छेनी-हथौड़ी और 9 महीने का तप, रामलला की मूर्ति बनने की अनसुनी दास्तान बयां करती है यह किताब

यह किताब अयोध्या के भव्य राम मंदिर में विराजमान 5 साल के बालक राम यानी रामलला की उस दिव्य मूर्ति के निर्माण की कहानी है, जिसे मैसूर के मशहूर मूर्तिकार अरुण योगीराज ने गढ़ा है।

जब हम किसी भव्य मंदिर में जाते हैं और भगवान की मनमोहक मूरत के आगे शीश झुकाते हैं, तो हमारा ध्यान उस दिव्य छवि पर ही टिका रह जाता है। हम शायद ही कभी उस कलाकार और उन हाथों के बारे में सोचते हैं, जिन्होंने एक साधारण से पत्थर को तराशकर उसमें प्राण फूंक दिए। एस. सीतालक्ष्मी और राहुल नंदन द्वारा लिखी गई किताब द गोल्डन चिजल: द स्टोरी बिहाइंड द मेकिंग ऑफ रामलला (The Golden Chisel: The Story Behind The Making Of Ramlala) हमें इसी अनछुए पहलू से रूबरू कराती है।

The Golden Chisel

रामलला की मूर्ति बनने की अनसुनी दास्तां बयां करती है The Golden Chisel

यह किताब अयोध्या के भव्य राम मंदिर में विराजमान 5 साल के बालक राम यानी रामलला की उस दिव्य मूर्ति के निर्माण की कहानी है, जिसे मैसूर के मशहूर मूर्तिकार अरुण योगीराज ने गढ़ा है।

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