Swami Dayanand Saraswati Jayanti 2024: हर साल आर्य समाज के संस्थापक और आधुकिनक भारत के महान सुधारक महर्षि दयानद सरस्वती को याद करते हुए दयानद सरस्वती जयंती मनाई जाती है। इस साल स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती आज 5 मार्च 2024 को है। महर्षि दयानंद (Who Is Dayanand Saraswati) ने बाल विवाह, जाति व्यवस्था, पशु बलि और महिलाओं के खिलाफ भेदभाव सहित कई सामाजिक समस्याओं के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की थी। दयानन्द सरस्वती (Swami Dayanand Saraswati) ने तीर्थयात्राओं और मूर्ति पूजा का भी बहिष्कार किया था। उनके जीवन का कार्य वैदिक मान्यताओं को पुनर्जीवित करना था क्योंकि वे इस बात पर अड़े थे कि हिंदू धर्म अपने मूल मूल्यों से भटक गया है। आर्य समाज स्वामी दयानंद द्वारा स्थापित एक एकेश्वरवादी भारतीय हिंदू सुधार संगठन है जो नैतिक सिद्धांतों और प्रथाओं को बढ़ावा देने में वेदों के सर्वोच्च अधिकार को बरकरार रखता है।
Swami Dayanand Saraswati Life Changing Quotes
स्वामी दयानंद सरस्वती के अनमोल विचार (Swami Dayanand Saraswati Motivational Quotes)
महर्षि दयानंद सरस्वती (Maharishi Dayanand Saraswati) की जयंती पर उनके अनुयायी उनकी कही गई बातों, समाज सुधार के कार्यों और उनकी दी गई सीख को याद करते हैं। स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती पर आइ पढ़ते हैं उनके कुछ विचार जो आपको सोचने की नई दिशा प्रदान कर सकते हैं:1. कोई मूल्य तब मूल्यवान है जब मूल्य का मूल्य स्वंय के लिए मूल्यवान हो।
2. वह अच्छा और बुद्धिमान है जो हमेशा सच बोलता है, धर्म के अनुसार काम करता है और दूसरों को उत्तम और प्रसन्न बनाने का प्रयास करता है।
3. नुकसान से निपटने में सबसे जरूरी चीज है उससे मिलने वाले सबक को ना भूलना। वो आपको सही मायने में विजेता बनाता है।
4. धन एक वस्तु है जो ईमानदारी और न्याय से कमाई जाती है। इसका विपरीत है अधर्म का खजाना।
5. आप दूसरों को बदलना चाहते हैं ताकि आप आजाद रह सकें, लेकिन ये कभी ऐसे काम नहीं करता। दूसरों को स्वीकार करिए और आप मुक्त हैं।
6. जीवन में मृत्यु को टाला नहीं जा सकता। हर कोई ये जानता है, फिर भी अधिकतर लोग अन्दर से इसे नहीं मानते। इसी कारण से मृत्यु सबसे कठिन चुनौती है जिसका मनुष्य को सामना करना पड़ता है।
7. अगर आप पर हमेशा ऊंगली उठाई जाती रहे तो आप भावनात्मक रूप से अधिक समय तक खड़े नहीं हो सकते।
8. किसी भी रूप में प्रार्थना प्रभावी है क्योंकि यह एक क्रिया है इसलिए इसका परिणाम होगा। यह इस ब्रह्मांड का नियम है जिसमें हम खुद को पाते हैं।
9. कोई भी मानव हृदय सहानुभूति से वंचित नहीं है। कोई धर्म उसे सिखा-पढ़ा कर नष्ट नहीं कर सकता। कोई संस्कृति, कोई राष्ट्र कोई राष्ट्रवाद- कोई भी उसे छू नहीं सकता क्योंकि ये सहानुभूति है।
