Shayari of the day: माना की तेरी दीद के काबिल नहीं हूं मैं.., जानें क्या कहता है अल्लामा इकबाल का यह शेर

Shayari of the day: इस शेर का मूल भाव यह है कि सच्चा प्रेम किसी योग्य या अयोग्य होने की शर्तों पर नहीं टिका होता, बल्कि उसमें चाहत, धैर्य और समर्पण ही सबसे बड़ी बात होती है।

Shayari of the day: अल्लामा मुहम्मद इकबाल का नाम शायरी की दुनिया में बेहद अदब से लिया जाता है। 9 नवंबर 1877 को पाकिस्तान के सियालकोट में जन्मे अल्लामा इकबाल शायर-ए-मशरिक और मुस्लिम रिनेसॉस का पुरोधा भी कहा जाता है। इकबाल की शायरी में जीवन के हर रंग बड़ी खूबसूरती से दिखते थे। उन्होंने मानवीय एहसास और समाज की हर जरूरत पर शेर लिखे हैं। उनके कई शेर ऐसे हैं जो आज भी प्रासंगिक हैं और लोग आम बातचीत में भी इस्तेमाल करते हैं। अल्लामा इकबाल का ऐसा ही एक मशहूर कलाम है:

Allama Iqbal Shayari of the Day

आज की शायरी (Photo: iStock)

"माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूं मैं, तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख"

क्या हैं इस शेर के मायने

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