पीयूष पांडे: दो बूंद जिंदगी की देने वाला 'जादूगर', पहली बार पड़ोसी की टीवी पे छिप कर देखा था अपना मशहूर ऐड

Ad Guru Piyush Pandey: कई तरह के रोजगार में हाथ आजमाने के बाद 1982 में 27 साल की उम्र में पीयूष पांडे ने कमर्शियल ऐड की दुनिया में कदम रखा। उस वक्त भारत की ऐड इंडस्ट्री को शायद ही ये अंदाजा हो कि यह शख्स यहां नई इबारत लिखने आया है। आते ही पीयूष ने दिखा दिया कि सितारों के आगे जहां और भी है। उन्होंने कई प्रॉडक्ट्स के लाजवाब और यादगार ऐड डिजाइन किये।

देश के मशहूर एड गुरु पीयूष पांडे का गुरुवार को निधन हो गया। 70 वर्ष की उम्र में मुंबई में उन्होंने अंतिम सांस ली। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश की तमाम बड़ी हस्तियों ने उनके निधन पर शोक जताया है। Gen Z पीयूष पांडे को 'अबकी बार मोदी सरकार' कैंपेन के शिल्पकार के तौर पर पहचानती है, लेकिन उनसे एक पीढ़ी पहले वालों के लिए पीयूष पांडे वह शख्सियत थे जिन्होंने पूरे देश को 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' के धागे में पिरोया।

पीयूष पांडे: दो बूंद जिंदगी की देने वाला 'जादूगर', पहली बार पड़ोसी की टीवी पे छिप कर देखा था अपना मशहूर ऐड

बड़े परिवार में पले, बड़े सपने देखे

1955 को राजस्थान के जयपुर में जन्मे पीयूष पांडे 9 भाई-बहन थे। मशहूर गायिका इला अरुण पीयूष की बहन और जाने माने निर्देशक प्रसून पांडे उनके भाई हैं। पिता बैंक में काम करते थे। बड़े परिवार में पले बढ़े पीयूष पांडे के सपने भी हमेशा से बड़े थे। उन्होंने जयपुर के सेंट जेवियर्स स्कूल से स्कूलिंग के बाद दिल्ली का रुख कर लिया। यहां उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से ग्रेजुएएशन किया। दिल्ली से ही इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया। किताबों की दुनिया से निकले तो उन्होंने रेडियो से दिल लगा लिया। वहां वह डेली यूज वाले साधारण प्रोडट्क्स के लिए जिंगल्स लिखने और पढ़ने लगे। इसी दरम्यान वह अपने क्रिकेट के शौक को भी जीते थे।

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