बच्चे जब छोटे होते हैं तो उनमें बहुत ज्यादा प्यार होता है। कई बार वही बच्चे बड़े होकर एक दूसरे से भावनात्मक रूप से दूर नजर आते हैं। हालांकि बहुत से ऐसे भाई बहन भी होते हैं जो 50-60 की उम्र में भी हद से ज्यादा करीब नजर आते हैं। डेवलपमेंट साइकलॉजी की मानें तो इस फर्क की शुरुआत बचपन में ही हो जाती है और इसमें सबसे बड़ी भूमिका माता-पिता निभाते हैं। तो आइए जानते हैं कि ऐसा क्या करते हैं वो माता-पिता जिनके बच्चे 40-50 साल बाद भी दोस्त बने रहते हैं?
पेरेंटिंग की ये छोटी बातें बच्चों के भविष्य को रिश्ते पर डालती हैं बड़ा असर (AI Generated Image)
ब्रिटिश डेवलपमेंट साइकलॉजिस्ट डॉ. जूडी डन ने 1980 और 1990 के दशक में ब्रिटेन के सैकड़ों परिवारों पर अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि जिन घरों में माता-पिता बच्चों के बीच होने वाले हर विवाद में किसी एक का पक्ष लेने के बजाय बातचीत के लिए प्रोत्साहित करते थे, वहां भाई-बहनों के रिश्ते किशोरावस्था और युवावस्था तक अधिक सकारात्मक बने रहे। जूडी ने सब अपनी किताब Siblings: Love, Envy and Understanding में लिखा है।
तो अगर आप भी चाहते हैं कि आपके बच्चे ताउम्र अच्छे दोस्त बने रहे तो आपको अपने पेरेंटिंग में इन बातों को जरूर ध्यान रखना होगा:
तुलना कभी ना करें
मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि लगातार तुलना भाई-बहनों के बीच प्रतिस्पर्धा और ईर्ष्या पैदा करती है। धीरे-धीरे यह दूरी का कारण बन सकती है। बच्चे की तुलना किसी दूसरे से नहीं, खुद उसकी अपनी प्रोग्रेस से होनी चाहिए।
बराबरी का व्यवहार सही रखें
कई पेरेंट्स बच्चों को बिल्कुल एक जैसी चीजें देने की कोशिश करते हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स कहते हैं कि निष्पक्षता और समानता अलग बातें हैं। अगर एक बच्चा पढ़ाई में मदद चाहता है और दूसरे को भावनात्मक सहयोग की जरूरत है, तो दोनों की जरूरतें अलग हैं।
बच्चों के झगड़े में ना बनें 'जज'
भाई-बहनों के बीच झगड़े होना सामान्य बात है, लेकिन हर बार तुरंत फैसला सुनाना सही तरीका नहीं होता। बच्चों को छोटे-छोटे विवाद खुद सुलझाने देना चाहिए। इससे उनमें बातचीत, समझौता और दूसरे की भावनाओं को समझने की क्षमता विकसित होती है। यही कौशल बड़े होने पर रिश्ते को मजबूत बनाता है।
बड़े बच्चे को बनाएं दूसरा माता-पिता
भारतीय परिवारों में बड़े भाई या बहन से कहा जाता है कि छोटे का पूरा ध्यान रखो। लेकिन बड़े बच्चों को मिनी पेरेंट बनाने को विशेषज्ञ सही नहीं मानते हैं। उनके मुताबिक बच्चों में रिश्ता बराबरी का होना चाहिए, न कि अभिभावक और बच्चे जैसा।
एक दूसरे की मदद का दें मौका
बच्चों को ऐसे टास्क दें, जो उन्हें मिल कर कना हो। इससे बॉन्डिंग अच्छी बनती है। रिसर्च भी यही कहती है कि यही बॉन्डिंग आगे चलकर साझा यादों में बदलते हैं। यही यादें जीवनभर रिश्ते को जोड़े रखती हैं।
भूलकर भी ना करें पक्षपात
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि अगर बच्चों को यह महसूस होने लगे कि एक भाई या बहन को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है, तो यह भावना वर्षों तक उनके मन में रह सकती है।
दुनिया की सबसे लंबी मानव विकास संबंधी शोध परियोजनाओं में शामिल हार्वर्ड स्टडी ऑफ एडल्ट डेवलेपमेंट कहती है कि जीवन की खुशहाली का सबसे मजबूत आधार अच्छे रिश्ते हैं। भाई-बहनों का रिश्ता भी उन्हीं रिश्तों में शामिल है। दोनों के बीच आजीवन बॉन्डिंग की असली नींव तो बचपन में पड़ती है।
