ओपिनियन: शादी का ना हो मन तो तुरंत करें इनकार, नर्क जैसी जिंदगी से बेहतर है परिवार की नाराजगी

हाल के कुछ मामलों ने एक बेहद असहज, मगर जरूरी सवाल खड़ा किया है। क्या सिर्फ समाज को खुश करने के लिए शादी कर लेना सही है?

हिंदुस्तान आज चांद पर पहुंच चुका है। बावजूद इसके हम अब भी शादी को किसी भी इंसान के मुकम्मल होने का प्रमाण मान रहे हैं। लड़कियों के लिए तो शादी ही आखिरी मंजिल समझता है हमारा समाज। उन्हें बचपन से सिखाया जाता है कि एक दिन उन्हें शादी करके अपना घर बसाना है। इस सामाजिक दबाव में कई लड़कियां अपनी मर्जी और भावनाओं को दबा लेती हैं। वे उस रिश्ते के लिए भी हां कह देती हैं, जिसके लिए उनका मन तैयार नहीं होता।

Ketan Aggarwal Case

बिना मन की शादी का अंत कभी सुखद हो ही नहीं सकता (प्रतीकात्म तस्वीर AI से बनाई गई है)

हाल के कुछ मामलों ने एक बेहद असहज, मगर जरूरी सवाल खड़ा किया है। क्या सिर्फ समाज को खुश करने के लिए शादी कर लेना सही है? राजा रघुवंशी हत्याकांड और केतन अग्रवाल-सिया गोयल मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया। इन मामलों में जांच एजेंसियों के सामने जो बातें आईं उसका लब्बोलुआब यही रहा है कि लड़की ने बिना मन के शादी के लिए हामी भरी। इस बिना मन की रजामंदी का जो अंजाम हुआ वो आपके सामने है।

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