राजमहल से ओणम तक: कसावु साड़ी की सफेद-सुनहरी कहानी में छिपा है केरल का शाही फैशन इतिहास

ओणम पर केरल की गलियों से लेकर घरों तक सफेद-सुनहरी कसावु साड़ी की चमक दिखाई देती है। लेकिन इसकी पहचान सिर्फ खूबसूरत बॉर्डर तक सीमित नहीं। इसके पीछे हथकरघे, बुनकरों, राजपरंपरा और बदलते फैशन की दिलचस्प कहानी छिपी है।

Onam Special Kasavu Saree: ओणम का त्योहार सोचिए और एक तस्वीर अपने आप दिमाग में बनती है.. फूलों की पुक्कलम, केले के पत्ते पर सजा सद्या, घरों में उत्सव का माहौल और सफेद-सुनहरी साड़ी में तैयार महिलाएं। केरल की कसावु साड़ी शायद उन चुनिंदा कपड़ों में से है, जिसे देखते ही किसी और परिचय की जरूरत नहीं पड़ती। इसका ऑफ-व्हाइट रंग और सुनहरी किनारी मिलकर ऐसा लुक बनाते हैं, जिसमें न ज्यादा रंग चाहिए, न भारी कढ़ाई।

Onam Special Kasavu Saree/mundu History

लेकिन असली दिलचस्पी यहीं से शुरू होती है। यह साड़ी आखिर इतनी खास बनी कैसे? क्या कसावु सिर्फ एक फैशन नाम है या किसी खास बुनाई की पहचान? और ओणम के साथ इसका रिश्ता इतना गहरा क्यों है? दरअसल, ‘कसावु’ शब्द मूल रूप से साड़ी का नहीं, बल्कि उसके सुनहरे जरी वाले हिस्से से जुड़ा है। केरल की पारंपरिक पोशाक में यह सुनहरी किनारी धीरे-धीरे इतनी पहचान बना गई कि पूरी साड़ी को ही लोग कसावु कहने लगे।

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