Masaba Gupta weight loss: मां बनने के बाद शरीर में बदलाव आना बिल्कुल आम बात है। इस दौरान कई महिलाओं का वजन बढ़ जाता है और उसे कम करना आसान नहीं होता है। लेकिन फैशन डिजाइनर और नीना गुप्ता की बेटी एक्ट्रेस मसाबा गुप्ता (Masaba Gupta) ने अपनी फिटनेस जर्नी से कई नई माओं को काफी प्रेरित किया है। मसाबा ने हाल ही में बताया कि पिछले 6 सालों में उन्होंने करीब 15 किलो वजन कम किया। खास बात यह है कि इस सफर में उन्होंने खुद पर ज्यादा दबाव नहीं डाला, बल्कि धीरे-धीरे लाइफस्टाइल बदलकर खुद को फिट बनाया। डिलीवरी के बाद शरीर और मन दोनों में बदलाव आते हैं, ऐसे में मसाबा की फिटनेस जर्नी उन महिलाओं के लिए मोटिवेशन बन सकती है जो हेल्दी तरीके से वजन कम करना चाहती हैं।
मसाबा गुप्ता ने 6 साल में घटाया 15 किलो वजन (Pc- Instagram)
6 साल में कम किया 15 किलो वजन
मसाबा गुप्ता ने सोशल मीडिया पर अपनी फिटनेस जर्नी शेयर करते हुए बताया कि पिछले 6 सालों में उनका वजन करीब 15 किलो कम हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि अब जब वह अपनी पुरानी तस्वीरें देखती हैं तो खुद को पहचान नहीं पातीं। यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि लंबे समय तक मेहनत, अनुशासन और हेल्दी आदतों का नतीजा है।
नीना गुप्ता की बेटी मसाबा गुप्ता की जर्नी किसी मोटीवेशन से कम नहीं
डिलीवरी के बाद फिटनेस पर दिया ध्यान
मां बनने के बाद महिलाओं के शरीर में काफी बदलाव आते हैं। मसाबा ने भी इस फेज को महसूस किया। लेकिन उन्होंने जल्दी रिजल्ट पाने की बजाय धीरे-धीरे अपने शरीर को समझा और उसी हिसाब से फिटनेस रूटीन अपनाया। यही वजह रही कि उनका वजन हेल्दी तरीके से कम हुआ और शरीर पर ज्यादा दबाव भी नहीं पड़ा।
स्ट्रिक्ट डाइट नहीं बैलेंस लाइफस्टाइल भी
मसाबा ने खुद को भूखा रखकर वजन कम नहीं किया। उन्होंने बैलेंस डाइट और एक्टिव लाइफस्टाइल को प्राथमिकता दी। सही समय पर खाना, हेल्दी चीजें खाना और नियमित वर्कआउट उनकी फिटनेस जर्नी का हिस्सा रहा। एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि तेजी से वजन घटाने की बजाय धीरे-धीरे वजन कम करना शरीर के लिए ज्यादा सुरक्षित होता है।
वर्कआउट बना रोजमर्रा की आदत
फिट रहने के लिए मसाबा ने एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। नियमित वर्कआउट न सिर्फ वजन कम करने में मदद करता है, बल्कि डिलीवरी के बाद शरीर को मजबूत बनाने में भी सहायक माना जाता है। फिटनेस एक्सपर्ट्स के अनुसार, लगातार एक्टिव रहने से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और शरीर ज्यादा एनर्जेटिक महसूस करता है।
खुद को स्वीकार करना भी जरूरी
मसाबा की फिटनेस जर्नी सिर्फ वजन कम करने तक सीमित नहीं रही। उन्होंने यह भी दिखाया कि हर महिला का शरीर अलग होता है और बदलाव आने में समय लगता है। खुद को स्वीकार करना और धीरे-धीरे बेहतर बनना ही असली फिटनेस है। यही वजह है कि उनकी कहानी लोगों को भावनात्मक रूप से भी जोड़ती है।
