Hybrid Family: क्या भारत में बदल रही है परिवार की परिभाषा? एक्सपर्ट्स से जानें खुशहाल रिश्तों का नया फॉर्मूला

Hybrid Family: भारत में परिवार की परिभाषा तेजी से बदल रही है। संयुक्त और न्यूक्लियर फैमिली की बहस के बीच अब 'हाइब्रिड फैमिली' मॉडल उभर रहा है। एक्सपर्ट्स के नजरिए से जानते हैं खुशहाल परिवार का असली फॉर्मूला क्या है।

Hybrid Family: रविवार की सुबह है और बेंगलुरु में रहने वाला आईटी इंजीनियर रोहन (बदला हुआ नाम) अपनी छह साल की बेटी के साथ वीडियो कॉल पर दादी से बात कर रहा है। दादी लखनऊ में हैं, चाचा जयपुर में और बड़ी बुआ भोपाल में हैं। त्योहारों पर पूरा परिवार एक छत के नीचे जुटता है, लेकिन बाकी साल सब अपने-अपने शहरों में रहते हैं। हालांकि किसी की तबीयत खराब हो जाए या कोई बड़ा फैसला लेना हो, पूरा परिवार एक साथ खड़ा नजर आता है।

Hybrid Family

नए दौर में परिवार की नई परिभाषा

यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उस नए भारत की है जहां परिवार का मतलब अब सिर्फ एक ही घर में रहना नहीं, बल्कि दूरी के बावजूद जुड़े रहना है। कई सालों तक यह सवाल पूछा जाता रहा कि संयुक्त परिवार बेहतर है या न्यूक्लियर फैमिली? लेकिन समाजशास्त्रियों का मानना है कि अब यह बहस धीरे-धीरे पुरानी पड़ रही है। आज भारतीय परिवार एक तीसरे मॉडल (Indian Family System) की ओर बढ़ रहे हैं, जिसे 'हाइब्रिड फैमिली मॉडल' कहा जाता है। तो चलिए एक्सपर्ट्स के नजरिए से जानते हैं क्या है फैमिली का ये नया फॉर्मूला....

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