Modi Jackets: आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन है। देशभर से लोग शुभकामनाएं भेज रहे हैं। पीएम मोदी जब भी किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन या राजनीतिक मंच पर होते हैं तो उनके भाषण और कूटनीति के साथ ही उनकी ड्रेसिंग भी चर्चा में आ जाती है। आधी बांह का कुर्ता, कड़क पायजामा और उसके ऊपर करीने से पहनी हुई स्लीवलेस जैकेट। यह लुक पिछले डेढ़ दशक से पूरी दुनिया में अपनी खास पहचान बनाए हुआ है।
जब जैकेट ने तय किया नेहरू से मोदी तक का सफर (AI Generated Image)
कभी लुटियंस दिल्ली के राजनीतिक गलियारों तक सीमित रहने वाली नेहरू जैकेट आज दुनियाभर में 'मोदी जैकेट' के नाम से धूम मचा रही है। दिलचस्प बात यह है कि यह बदलाव नाम के साथ ही जैकेट के कलर, फैब्रिक, फिटिंग और पहनने का तरीके में भी हुआ है। आइए समझते हैं कि कैसे एक पारंपरिक भारतीय परिधान ने सियासत के गलियारों से निकलकर रैंप वॉक, कॉर्पोरेट बोर्डरूम और आम जनता के दिलों में अपनी जगह बना ली।
नेहरू जैकेट से मोदी जैकेट तक का सफर
बिना आस्तीन वाली इस जैकेट का भारत में एक लंबा इतिहास रहा है। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ऐसी जैकेट पहना करते थे। उन्होंने इसे भारत और दुनिया के सामने एक खास पहचान दी। इसके बाद इसे आम तौर पर नेहरू जैकेट के नाम से जाना जाने लगा। तब यह काफी हद तक ढीली, खादी की बनी और सीमित रंगों (खासतौर पर सफेद, काली या स्लेटी) में होती थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पारंपरिक परिधान में आधुनिकता और नयापन पिरोया। ये आधुनिक मोदी जैकेट, पारंपरिक नेहरू जैकेट से कई मामलों में अलग है:
फिटिंग और कट: मोदी जैकेट की कटिंग ज्यादा मॉडर्न और शार्प है। शरीर पर इसकी फिटिंग साफ नजर आती है। यही वजह है कि यह कुर्ते के साथ पारंपरिक लुक देती है, लेकिन जरूरत के हिसाब से इसे ज्यादा फॉर्मल अंदाज में भी पहना जा सकता है।
रंगों का जलवा: रंगों की बात करें तो अब यह सिर्फ सफेद, काले या स्लेटी रंग तक सीमित नहीं है। लाल, नीला, पीला, मैरून और पेस्टल जैसे कई रंगों में यह जैकेट बाजार में मिलती है।
फैब्रिक: फैब्रिक भी बदल गया है। खादी के अलावा सिल्क, लिनेन, मैटी, वूलन और जूट कॉटन जैसे कपडों में भी इसे तैयार किया जाता है। बटन, कॉलर और पॉकेट की डिटेलिंग इसे पारंपरिक और मॉडर्न, दोनों तरह का लुक देती है।
मोदी जैकेट बनी कूटनीति का भी हिस्सा
कूटनीति समझौतों के साथ ही प्रतीकों से भी चलती है। पीएम मोदी ने अपनी जैकेट को भारत के 'सॉफ्ट पावर' के रूप में बखूबी इस्तेमाल किया है। जब भी कोई विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या बड़ा नेता भारत आता है, तो अकसर पीएम मोदी उन्हें यह जैकेट उपहार में देते हैं। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे से लेकर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन तक, कई दिग्गज वैश्विक नेता इस जैकेट को पहनकर तस्वीरें खिंचवा चुके हैं।
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन ने तो बाकायदा ट्वीट करके पीएम मोदी द्वारा भेजी गई मोदी जैकेट्स की तारीफ की थी और लिखा था कि ये जैकेट्स बिल्कुल उनके साइज की हैं और बेहद आरामदायक हैं। मून जे इन के इस ट्वीट के बाद तो अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान भी इसकी तरफ गया और मोदी जैकेट ग्लोबल ब्रांड बन गया।
बदली खादी और लोकल टेक्सटाइल की किस्मत
मोदी जैकेट का सबसे शानदार असर पड़ा है भारत के लोकल टेक्सटाइल और खादी उद्योग पर। पीएम बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने 'वोकल फॉर लोकल' का नारा दिया था। मोदी जैकेट ने इस नारे में जान फूंक दी। खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के आंकड़े इसकी गवाही देते हैं।
खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि मोदी जैकेट के क्रेज की वजह से खादी के आउटलेट्स पर बिक्री के सारे रिकॉर्ड टूट गए। जो युवा कभी खादी को केवल बुजुर्गों का कपड़ा मानते थे, वे अब फेस्टिवल्स, शादियों और ऑफिस फंक्शन्स में खादी की मोदी जैकेट पहनकर जाना कूल समझते हैं। इससे देश के बुनकरों, दर्जियों और लोकल कारीगरों को बहुत फायदा हुआ है।
वेस्टर्न सूट का देसी और स्मार्ट ऑप्शन
कुछ साल पहले तक किसी फॉर्मल कार्यक्रम के लिए भारतीय पुरुषों के पास विकल्प काफी सीमित माने जाते थे। वेस्टर्न सूट पहनिए या फिर पारंपरिक शेरवानी। मोदी जैकेट ने इन दोनों के बीच एक ऐसा विकल्प दिया, जिसे अलग-अलग मौकों पर आसानी से पहना जा सकता है।
कुर्ते-पायजामे के साथ इसे पहनिए तो पूरा देसी और पारंपरिक लुक तैयार हो जाता है। वहीं शर्ट और ट्राउजर के साथ यही जैकेट इंडो-वेस्टर्न अंदाज दे सकती है। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है। कॉलेज का 20 साल का स्टूडेंट हो, ऑफिस जाने वाला 35 साल का प्रोफेशनल हो या शादी में शामिल हो रहे 60 साल के अंकल- यह जैकेट हर उम्र और कद-काठी पर जचती है। मौसम के हिसाब से भी इसके विकल्प मौजूद हैं। गर्मियों के लिए लिनेन और खादी जैसी हल्की जैकेट, जबकि सर्दियों में वूलन या मखमली जैकेट।
जब जैकेट ने दिया सस्टेनेबल फैशन का संदेश
मोदी जैकेट से जुड़ा एक दिलचस्प प्रयोग तब देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में रीसाइकिल्ड प्लास्टिक की बोतलों से बनी हल्के नीले रंग की जैकेट पहनी। यह जैकेट इंडियन ऑयल (IOCL) ने तैयार की थी। इस्तेमाल की गई प्लास्टिक बोतलों को प्रोसेस करके उनसे फैब्रिक तैयार किया गया और उसी से जैकेट बनाई गई।
इस इको-फ्रेंडली जैकेट ने दुनिया भर के पर्यावरणविदों का ध्यान खींचा। प्लास्टिक वेस्ट से बनी इस जैकेट के जरिए भारत ने दुनिया को सस्टेनेबल और ग्रीन फैशन का एक बड़ा मैसेज दिया।
शादियों से लेकर बडे इवेंट्स तक बिखरा जलवा
आज भारतीय शादियों में भी मोदी जैकेट्स का चलन काफी आम हो चुका है। एक जैसे रंग की जैकेट पहनने वाले दूल्हे के दोस्त हों या परिवार के सदस्य, यह लुक शादी की तस्वीरों में भी खूब नजर आता है।
फैशन ब्रांड्स और पारंपरिक कपड़ों के स्टोर्स ने भी इस ट्रेंड को अपने तरीके से अपनाया है। खादी इंडिया से लेकर बड़े प्राइवेट ब्रांड्स तक, अलग-अलग तरह की मोदी जैकेट बाजार में मौजूद हैं। मान्यवर, रेमंड्स और खादी इंडिया जैसे कुछ ब्रांड्स तो इसके लिए बकायादा स्पेशल 'मोदी कलेक्शन' भी उतार चुके हैं।
बॉलीवुड एक्टर्स, क्रिकेटर्स और कॉर्पोरेट जगत के लोगों के बीच भी मोदी जैकेट को अलग-अलग मौकों पर देखा गया है। यानी जो नेहरू जैकेट कभी नेताओं के पहनावे से जोड़कर देखी जाती थी, वह मोदी जैकेट के अवतार में भारतीय पुरुषों की फॉर्मल और फेस्टिव ड्रेसिंग का एक आम हिस्सा बन चुकी है।
मोदी जैकेट आज बदलते और आत्मविश्वास से भरे भारत का प्रतीक है। इसने साबित कर दिया कि हमारा भारतीय पहनावा किसी भी वेस्टर्न सूट से कम स्मार्ट या एलिगेंट नहीं है। ये कहने में किसी को कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि सादगी, शालीनता और स्टाइल को एक साथ समेटे यह जैकेट आज 'आधुनिक और आत्मनिर्भर भारत' का एक ग्लोबल स्टाइल सिंबल बन चुका है।
