आज की शायरी: इंतजार, उम्मीद और टूटे हुए सपने का कॉकटेल है मजरूह सुल्तानपुरी का यह शेर

Aaj Ki Shayari: यह शेर इंतजार, बेचैनी और टूटते-जुड़ते उम्मीदों की बेहद गहरी तस्वीर पेश करता है। यहां मजरूह सुल्तानपुरी (Majrooh Sultanpuri Shayari) रात को केवल समय का एक टुकड़ा नहीं मानते, बल्कि उसे मानसिक अवस्था बना देते हैं। आइए समझते हैं इस शेर के क्या मायने हैं।

Shayari of The Day (आज की शायरी): मजरूह सुल्तानपुरी उर्दू शायरी और हिंदी शायरी ऐसे रचनाकार थे, जिन्होंने अदब और आम आदमी की भावनाओं के बीच की दूरी मिटा दी। 1 अक्टूबर 1919 को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में जन्मे मजरूह का असली नाम असरारुल हसन ख़ान था। उन्होंने परंपरागत उर्दू शायरी को आधुनिक संवेदना से जोड़ा और प्रेम, विद्रोह, उम्मीद और इंसानी संघर्ष को अपनी रचनाओं का विषय बनाया। उनकी कलम से निकले तमाम शेर आज भी लोगों की जुबान पर हैं। ऐसा ही एक शेर है:

Majrooh Sultanpuri

मजरूह सुल्तानपुरी की शायरी

शब-ए-इंतिज़ार की कश्मकश में न पूछ कैसे सहर हुई

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