लालगुड़ी जयरमन: संगीत का वो जादूगर जिसने भारत से बगदाद तक वायलिन की धुन से लहराया तिरंगा

लालगुड़ी जयरमन का जन्म 17 सितंबर 1930 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में हुआ था। उनका पूरा नाम लालगुड़ी गोपाल अय्यर जयरमन था। वे दक्षिण भारत के महान संगीतकार त्यागराज के वंशज थे, इसलिए उनके खून में संगीत था।

भारत ने दुनिया को अनगिनत महान कलाकार दिए हैं, जिन्होंने अपने हुनर से न केवल देश को गौरवान्वित किया, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत को पूरी दुनिया के सामने पेश किया है। ऐसे ही एक संगीतकार थे लालगुड़ी जयरमन, जिनका नाम आज भी भारतीय शास्त्रीय संगीत की बुलंदियों पर गूंजता है। उनकी वायलिन से निकली धुनें आत्मा तक को छू जाती थीं।

lalgudi jayaraman

लालगुड़ी जयरमन : विश्वभर में गूंजी भारतीय शास्त्रीय संगीत की धुन (Photo: Saregama/You Tube)

उनकी कला का एक अद्भुत प्रमाण तब मिला, जब 1979 में दिल्ली के ऑल इंडिया रेडियो में उनकी एक प्रस्तुति को बगदाद की अंतरराष्ट्रीय संगीत परिषद ने दुनिया भर से भेजी गई 77 रिकॉर्डिंग्स में सबसे श्रेष्ठ माना। यह भारत के लिए गर्व का क्षण था और लालगुड़ी जयरमन के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि।

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