Kyon naya towel pani nahi sokhta: नया तौलिया खरीदने का अपना अलग ही उत्साह होता है। मुलायम कपड़ा, चमकता रंग और ऐसी पैकिंग कि उसे देखकर लगता है कि अब नहाने का अनुभव भी किसी लग्जरी होटल जैसा होगा। लेकिन पहली बार इस्तेमाल करते ही मेरा सारा उत्साह पानी-पानी हो गया। मजेदार बात यह थी कि तौलिया खुद पानी-पानी होने के लिए तैयार नहीं था!
नया तौलिया पानी ठीक से नहीं सोखता, लेकिन क्यों
नहाने के बाद मैंने नए तौलिए से शरीर पोंछा, लेकिन पानी सूखने के बजाय त्वचा पर इधर-उधर फैलता रहा। तौलिया देखने में मोटा और बेहद मुलायम था, फिर भी पुराने, थोड़े खुरदरे तौलिए जितना पानी नहीं सोख पा रहा था। पहले लगा शायद तौलिया अच्छी क्वालिटी का नहीं है। फिर समझ आया कि नया तौलिया शुरूआत में पूरा पानी सोखता नहीं है।
पैकिंग की वजह से नया तौलिया पानी नहीं सोखता
तौलिया बनाने वाली कंपनियां पैकिंग में इसे आकर्षक, मुलायम और चमकदार दिखाने के लिए उसकी सतह पर खास तरह की फिनिशिंग करती हैं। इसमें सिलिकॉन, फैब्रिक सॉफ्टनर या अन्य कोटिंग का इस्तेमाल हो सकता है। यह परत तौलिए के रेशों को बहुत मुलायम तो बना देती है, लेकिन साथ ही उनके भीतर पानी पहुंचने से भी रोकती है।
यानी जिस सॉफ्टनेस से प्रभावित होकर हम तौलिया खरीदते हैं, शुरुआत में वही उसकी पानी सोखने की क्षमता कम कर सकती है। इसे ऐसे समझिए जैसे तौलिए के रेशों पर कोई कोटिंग हो जो नजर न आती हो।
इसके अलावा, निर्माण और पैकिंग के दौरान तौलिए पर धूल, अतिरिक्त रंग और दूसरे अवशेष भी रह सकते हैं। इसलिए नया तौलिया सीधे पैकेट से निकालकर इस्तेमाल करना सही नहीं माना जाता।
पुराना तौलिया इस्तेमाल में बेहतर क्यों लगता है
लगातार धुलने से तौलिए पर लगी शुरुआती कोटिंग धीरे-धीरे निकल जाती है। उसके रेशे खुलने लगते हैं और उनके बीच पानी को पकड़ने के लिए ज्यादा जगह बन जाती है। यही कारण है कि कुछ बार धोने के बाद वही तौलिया पहले से बेहतर पानी सोखने लगता है।
हालांकि यहां भी एक छोटी-सी गलती खेल बिगाड़ सकती है। अगर हर बार बहुत ज्यादा फैब्रिक सॉफ्टनर डालकर तौलिया धोया जाए, तो उसके रेशों पर दोबारा चिकनी परत जम सकती है। इससे वह खुशबूदार और मुलायम तो रहेगा लेकिन पानी सोखने में फिर कमजोर पड़ सकता है।
नए तौलिए को पहली बार कैसे धोएं
मैंने अपने नए तौलिए को इस्तेमाल से पहले सामान्य डिटर्जेंट से अलग धोया। फैब्रिक सॉफ्टनर नहीं डाला और उसे अच्छी तरह सुखाया। एक-दो धुलाई के बाद फर्क साफ नजर आने लगा। तौलिया अब केवल पानी को शरीर पर घुमा नहीं रहा था, सच में सोख रहा था।
वैसे, अपने एक्सपीरियंस से मैंने ये भी समझा कि नए तौलिए को पहली बार दूसरे कपड़ों से अलग धोना बेहतर रहता है, क्योंकि उसका रंग निकल सकता है और छोटे-छोटे रेशे भी झड़ सकते हैं। बहुत ज्यादा डिटर्जेंट या सॉफ्टनर डालने से बचें। लेबल पर लिखे वॉशिंग निर्देश भी जरूर पढ़ें।
तो अगली बार नया तौलिया नहाने के बाद आपको आधा गीला छोड़ दे, उसे तुरंत बेकार न समझें। हो सकता है उसे बस एक-दो धुलाई और पुराने तौलिए जैसी थोड़ी-सी समझदारी हासिल करने की जरूरत हो।
