किताब कैफे: क्या भूख हड़ताल सच में सत्ता को झुका सकती है? इस किताब में मिलेंगे जवाब

किताब कैफे (Kitaab Cafe): अगर आप यह समझना चाहते हैं कि एक व्यक्ति का खाना छोड़ देना कैसे करोड़ों लोगों की राजनीति, नैतिकता और इतिहास को प्रभावित कर सकता है, तो यह किताब पढ़नी होगी।

किताब कैफे (Kitaab Cafe): जंतर मंतर पर भूख हड़ताल पे बैठे सोनम वांगचुक को वहां से जबरन हटा दिया गया है। उनकी जगह अब कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। इस मुद्दे पर खूब राजनीति भी हो रही है। इन सबके बीच एक सवाल बार-बार मन में आना लाजमी है कि आखिर भूख विरोध का इतना बड़ा हथियार कैस बन जाती है? आखिर कैसे कोई इंसान अपने शरीर को कष्ट पहुंचाकर सामने वाले को झुका देने का दम रखता है। किसी व्यक्ति का अपना शरीर राजनीतिक संदेश कैसे बन सकता है?

The Fasts of Mahatma Gandhi: Politics as Prayer

किताब कैफे: द फास्ट्स ऑफ महात्मा गांधी (AI Generated Image)

भूख हड़ताल से जुड़े ऐसे ही ना जाने कितने सवालों के जवाब देती है महात्मा गांधी के अनशनों पर लिखी शानदार किताब The Fasts of Mahatma Gandhi: Politics as Prayer. इस चर्चित किताब के राइटर हैं मशहूर ब्रिटिश इतिहासकार थॉमस वेबर।

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