द लेडीज मर्करी (The Ladies Mercury): आज अगर किसी महिला को रिलेशनशिप एडवाइस चाहिए, करियर से जुड़ी जानकारी चाहिए, हेल्थ को लेकर कुछ पूछना है या कुछ और खास जानना है, तो उसके पास विकल्पों की कमी नहीं है। अखबार, मैगजीन, वेबसाइट, यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया हर जगह खास महिलाओं के लिए जानकारियां मौजूद हैं।
27 जून 1693 को छपी थी महिलाओं की पहली मैगजीन ( AI Generated Image)
अब जरा सोचिए, उस दौर की महिलाओं के बारे में, जब अखबारों में उनके लिए कोई जगह नहीं थी। उनके सवालों को गंभीर नहीं माना जाता था, उनकी जिज्ञासाओं को निजी मामला समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता था और सार्वजनिक जीवन में उनकी आवाज लगभग न के बराबर सुनी जाती थी। लेकिन 17वीं शताब्दी जब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा था तब आखिरकार महिलाओं की जरूरतों को मंच मिला।
27 जून 1693 को इंग्लैंड में द लेडीज मर्करी नाम से कुछ पन्नों की मैगजीन पब्लिश हुई। यह मैगजीन दुनिया की पहली ऐसी मैगजीन के तौर पर दर्ज हुई जो पूरी तरह से महिलाओं के लिए छपती थी।
द लेडीज मर्करी की कैसे पड़ी नींव
यह सत्रहवीं शताब्दी का यूरोप था। महिलाओं की दुनिया काफी हद तक घर की चारदीवारी तक सीमित थी। उन्हें उच्च शिक्षा के मौके कम मिलते थे। राजनीति में उनकी कोई भागीदारी नहीं थी। पत्रकारिता की दुनिया में उनकी मौजूदगा लगभग न के बराबर थी।
उसी दौर में इंग्लैंड में द एथेनियन मर्करी नाम की मैगजीन निकलती थी। इसकी खासियत थी कि लोग अपने सवाल भेजते थे और मैगजीन उनके सवालों के जवाब प्रकाशित करती थी। मैगजीन के पास महिलाओं के भी खूब सवाल आते। ये सवाल प्रेम, विवाह, रिश्ते, स्वास्थ्य और निजी दुविधाओं से जुड़े होते थे। जैसे कि क्या प्रेम-विवाह सही है? पति-पत्नी के बीच मतभेद कैसे सुलझें? प्रेग्नेंसी के बाद खुद को कैसे मेंटेन करें?
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आज भले ये सवाल बहुत सामान्य लगते हैं, लेकिन उस समय किसी महिला का सार्वजनिक रूप से ऐसे प्रश्न पूछना भी साहस की बात थी। जब दिनों दिन महिलाओं के सवालिया खत बढ़ने लगे, तो द एथेनियन मर्करी को महिलाओं के लिए अलग से एक मैगजीन छापने का आइडिया आया। इस तरह से जन्म हुआ द लेडीज मर्करी का।
द लेडीज मर्करी के जरिए महिलाओं के लिए पहली बार ऐसा मंच मिला, जहां उनके सवालों को अहमियत दी जाने लगी। इस मैगजीन का उद्देश्य साफ था कि महिलाओं की अपनी दुनिया और अपनी समस्याएं हैं। उनकी बातों को भी समाज में बराबर जगह मिलनी चाहिए।
ज्यादा नहीं चली लेकिन इतिहास बना गई The Ladies Mercury
व्यावसायिक कारणों से 'द लेडीज मर्करी' बहुत लंबे समय तक नहीं चल सकी। लेकिन बंद होने से पहले ये इतिहास बदल चुकी थी। इस मैगजीन ने पहली बार दुनिया को यह एहसास कराया कि महिलाओं के लिए अलग पत्रकारिता की जरूरत है। इसके बाद यूरोप और अमेरिका जैसे विकसित देशों में महिलाओं के लिए खास पत्रिकाओं की बाढ़ सी आ गई।
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आज औरतों की दुनिया पूरी तरह से बदल चुकी है। अब वो बस मैगजीन में सवाल नहीं पूछती हैं। वे बड़े-बड़ अखबार और पत्रिकाओं की संपादक हैं, प्रकाशक हैं, न्यूजरूम चला रही हैं और मीडिया संस्थानों की प्रमुख भी हैं। उनकी आवाज आज पूरी दुनिया में सुनी जा रही है।
