Kargil Vijay Diwas 2024 Deshbhakti Shayari: हर साल की तरह इस साल भी 26 जुलाई यानी आज कारगिल दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन कारगिल युद्ध के नायकों के सम्मान में मनाया जाता है। इस साल कारगिल युद्ध की 25वां वर्षगांठ है। आज के ही दिन हमारे देश के जवानों ने 1999 में पाकिस्तान के साथ 3 महीने तक चले बड़े युद्ध में जीत हासिल कर देश को गौरवान्वित किया था। इस युद्ध में करीब 2 लाख सैनिक शहीद हुए थे और 26 जुलाई 1999 को कारगिल का युद्ध खत्म हुआ था। इन्हीं वीर जवानों की वीर गाथा को नमन करने के लिए हर साल कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। जब बात देश के वीर जवानों की हो और देश भक्ति शायरी का जिक्र ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता है। ऐसे में कारगिल विजय दिवस के मौके पर हम आपके लिए कुछ देशभक्ति शायरी लेकर आए हैं जिसे आप अपने करीबियों के साथ शेयर कर देश के वीर जवानों को श्रद्धांजली दे सकते हैं।
Kargil Vijay Diwas Deshbhakti Shayari
बलिदानों की ज्वाला जलाए रखना,
लहराता तिरंगा यूं ही उठाये रखना
जान जाए तो जाये कोई गम नहीं
देश पर कुर्बानियों का मातम न कर
मौत के बाद भी खुद को मुस्कराए रखना।
न झुकने देना कभी इसके मान को,
न मिटने देना कभी इसकी शान को।
चाहे कुर्बान करनी पड़े जान को।।
अपने सीने से इसको लगाए रखना
ये तिरंगा यूं ही उठाये रखना।
इन रंगों में बलिदानों का रंग तुम्हे मिल जायेगा,
ओढ़ तिरंगा निकलोगे तो अहसास तुम्हे हो जाएगा।
कितनो ने इसके खातिर खुद को सूली चढ़ा दिया,
इतिहास के पन्नो में पढने को मिल जायेगा ।।
Deshbhakti Quotes in Hindi
काश मरने के बाद भी वतन के काम आता
शहीदों के दुनिया में अपना भी नाम आता
हंस के लुटा देते जान इस वतन के लिए
कोई फिक्र नहीं होती गर ऐसा मुकाम आता।।
अब है तुम्हारा फर्ज इसे आगे लेकर जाना है,
इस झंडे को दुश्मन की छाती पर फहराना है।।
राज तिलक और भगत गुरु ने लहू से अपने सींचा है,
तब जाके हरा-भरा अपना आज बगीचा है ।।
मर मिटेंगे हम अपने वतन के लिए ,
जान कुर्बान है प्यारे चमन के लिए
हमसे हमारी अब हसरत न पूछो
बाँध रखा सर पे तिरंगा कफ़न के लिए ।।
Kargil Vijay Diwas Photo Status
इसके वाश्ते अपनी जाँ तक लुटा देंगे हम
हमसे टकराए तो उसकी हस्ती मिटा देंगें हम
सर हिमालय का हम न झुकने देंगे कभी
इसकी चोटी पर तिरंगा फहरा देंगे हम ।।
अब लहू से इस चमन को सीचेंगे हम
इसके खातिर जवानी लुटा जायेंगे
कोई दुश्मन की नजर लगे न इसे
इसके सदके में खुद को बिछा जायेंगे।।
ये जोश कभी कम नहीं होगा,
वीरों के बलिदानों से आया है।
कितनो ने लहू बहाया है,
तब जा के तिरंगा पाया है ।।
है जान जब तक मेरे सीने में हमारी ,
वतन की शान को न मिटने देंगे।
हम वीर सपूत हैं हम बलिदानी हैं
अपने इस चमन को लहू से सीच देंगे ।
इन रगो में बहता लहू है बस वतन परस्ती की
है सीने में जलती ज्वाला इसके हस्ती की
कोई लहर उसे क्या बहा लियेगी गह्ररी धारा में
हम जैसे पतवार रहें जिस भी कस्ती की ।।
