Habib Ahmed Death: मशहूर हेयर स्टाइलिस्ट जावेद हबीब के पिता हबीब अहमद का निधन हो गया है। वह 85 साल के थे। खुद जावेद हबीब ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने पिता के इंतकाल की खबर शेयर की है। दिवंगत हबीब अहमद भी बाल काटने के लिए विख्यात थे। उन्होंने अपने पिता नजीर अहमद से जो सीखा वो अपने बेटे जावेद हबीब को विरासत में दिया। उसी विरासत का सबसे बड़ा उदाहरण है हबीब्स (Jawed Habib Hair and Beauty Salon)। आज देश दुनिया में जावेद हबीब के एक से बढ़कर एक नामी गिरामी हस्तियां कस्टमर हैं, लेकिन उनके पिता हबीब अहमद देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बाल काटा और संवारा करते थे।
इंदिरा गांधी और एपीजे अब्दुल कलाम (Photos: Wikipedia/facebook)
अपने बच्चों के साथ हबीब अहमद (Photo: Jawed Habib fb)
जलालाबाद से राष्ट्रपति भवन तक का सफर
हबीब अहमद का जन्म 2 अक्टूबर 1940 को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के पास जलालाबाद में हुआ था। बाल काटना उनका पुस्तैनी काम था। हबीब अहमद के पिता नजीर अहमद दिल्ली में अंग्रेजी अफसरों के बाल काटा करते थे। नजीर गुलाम भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन के निजी नाई थे। नजीर ही माउंटबेटन के बाल काटा और स्टाइल किया करते थे। देश आजाद हुआ तो नजीर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और राजेंद्र प्रसाद जैसी विभूतियों के नाई बन गए।
नेहरू और इंदिरा हुए मुरीद
समय के साथ जब नजीर अहमद की उंगलियों ने कैंची थामने से इनकार किया तो उन्होंने ये जिम्मेदारी विरासत में अपने बेटे हबीब अहमद को सौंप दी। अब हबीब अहमद देश के पहले प्रधानमंत्री के नाई बन गए। हबीब अहमद ना सिर्फ नेहरू बल्कि इंदिरा गांधी के भी हेयर स्टाइलिस्ट थे। वह हबीब अहमद ही थे जिन्होंने इंदिरा गांधी को काले और सफेद बालों वाला आइकॉनिक लुक दिया था। हबीब अहमद का परिवार तब दिल्ली में ही राष्ट्रपति भवन के स्टाफ क्वार्टर में रहता था। जावेद हबीब का जन्म भी राष्ट्रपति भवन में ही हुआ था।
(Photo: Jawed Habib fb)
एपीजे अब्दुल कलाम को दिया सिल्वर हेयर लुक
हबीब अहमद के हुनर की मुरीद और भी बड़ी हस्तियां थीं। इनमें एक मशहूर नाम पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत एपीजे अब्दुल कलाम का भी आता है। वह हबीब अहमद ही थे जिन्होंने डॉ. कलाम को सिल्वर हेयर लुक दिया था। बाद में कलाम के जीवन के अंतिम सालों में उनके बालों को जावेद हबीब ने भी स्टाइल किया।
डॉ. कलाम के साथ हबीब अहमद का परिवार (Photo: Jawed Habib fb)
हजामत के काम को दिलाया सम्मान
हबीब अहमद जानते थे कि वह चाहे जितनी भी मशहूर शख्सियतों के हेयर स्टाइल कर लें, लोग बाल काटने के काम और बाल काटने वालों को वो सम्मान नहीं देंगे जिसके वो हकदार हैं। लोगों की इसी सोच को बदलने के मकसद से हबीब अहमद ने अपने बेटे जावेद को हेयर स्टाइलिंग की बारीकियों सीखने के लिए लंदन भेज दिया। लंदन से लौट कर ही साल 1984 में जावेद हबीब ने देश में पहला Jawed Habib Hair and Beauty Salon खोला। आगे चलकर यह इतना बड़ा ब्रांड बना कि आज देश में इसके हजार से ज्यादा आउटलेट्स हैं। सिर्फ जावेद ही नहीं अपने बाकी दोनों बच्चों, परवेज और अमजद को भी उन्होंने हेयर स्टाइलिंग की दुनिया में चमकने का हुनर सिखाया।
आज लोग हेयर स्टाइलिस्ट को वो सम्मान देते हैं जिसके वो हकदार हैं। अगर ये कहा जाए कि इस सम्मान के पीछे हबीब अहमद की दूरदर्शिता का बड़ा हाथ है तो कहीं से गलत ना होगा। हबीब अहमद की सोच का ही नतीजा है कि आज हेयर स्टाइलिंग को एक रिस्पेक्टेड करियर माना जाता है। वही हबीब अहमद अपने 85वें जन्मदिन से ठीक एक सप्ताह पहले इस दुनिया को अलविदा कह गए। भले वह आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी कला और विरासत हमेशा के लिए हिंदुस्तानियों के जेहन में जिंदा रहेगी।
