जतसार गीत: पिसता अनाज और छलकता दर्द, जांता के साथ कहां गुम हो गई जतसारी

Jatsaar Geet: जतसार जांता और सार से मिलकर बना है। जांता कहते हैं पत्थर की चक्की को और सार कहते हैं गीत को। मतलब कि जांता चलाते हुए जो गीत गाया जाता है उसे जतसार कहते हैं। भोजपुरी लोक परंपराओं में हर तरह के श्रम के लिए एक गीत है। जैसे जब धान की रोपनी होती है उस वक्त के लिए खास गीत है तो वहीं जब फसल की कटाई होती है तो उसके लिए चैता जैसे लोकगीत हैं। जतसार भी एक तरह का श्रमगीत है।

साल 1959 में हीरा-मोती नाम की एक फिल्म आई थी। फिल्म में अभिनेत्री निरूपा रॉय और शुभा खोटे पर एक भोजपुरी गाना फिल्माया गया था। यह गाना ऐसे थे कि निरूपा राय चक्की चला रही हैं और गा रही हैं -

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जतसार गीत: पिसता अनाज और छलकता दर्द, जांता के साथ कहां गुम हो गई जतसारी

कौन रंग मूंगवा कौन रंग मोतिया कऊन रंग ननदी तोरे बिरना

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