International Literacy Day 2026: किसी बच्चे का पहली बार अपना नाम लिखना हो या किसी बुजुर्ग का खुद चिट्ठी पढ़ लेना, पढ़ना-लिखना जिंदगी में छोटे दिखने वाले लेकिन बहुत बड़े बदलाव ला सकता है। इसी सोच को याद दिलाने के लिए हर साल 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। यूनेस्को के अनुसार यह दिवस 1967 से मनाया जा रहा है और इसका उद्देश्य साक्षरता की अहमियत को दुनिया के सामने रखना है।
टाइम्स नाऊ नवभारत पर यह भी पढ़ें - बेटियों की सुरक्षा का 'दायरा' बढ़ाने के 5 जरूरी कदम
साक्षर होने का मतलब केवल किताब के शब्द समझ लेना नहीं है। आज के समय में जरूरी है कि इंसान जानकारी को समझे, सही और गलत में फर्क कर सके और अपने फैसले खुद लेने का आत्मविश्वास रखे। मोबाइल और इंटरनेट के दौर में यह जरूरत और बढ़ गई है। अब पढ़ने की आदत के साथ जानकारी को परखना भी जरूरी है। इसलिए साक्षरता को सिर्फ स्कूल की चारदीवारी तक सीमित देखने के बजाय इसे रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर समझना चाहिए।
साक्षरता क्यों है जरूरी
साक्षरता इंसान को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझने में मदद करती है। कोई व्यक्ति सरकारी योजना की जानकारी खुद पढ़ सके, बैंक का कागज समझ सके, दवा की पर्ची देख सके या किसी जरूरी दस्तावेज को बिना दूसरों पर निर्भर हुए समझ सके, तो यह उसकी बेहतरी के लिए जरूरी है।
बच्चों के लिए साक्षरता भविष्य की पहली सीढ़ी है, जबकि बड़ों के लिए यह आत्मनिर्भरता का रास्ता बन सकती है। यही वजह है कि साक्षरता को बेहतर और समान शिक्षा से भी जोड़ा जाता है।
साक्षरता के मायने बदले
पहले साक्षरता की बात मुख्य रूप से पढ़ने और लिखने तक होती थी। आज इसमें डिजिटल दुनिया को समझना भी जुड़ गया है। इंटरनेट पर मिलने वाली हर जानकारी सही नहीं होती। इसलिए किसी खबर को तुरंत मान लेने के बजाय उसके स्रोत को देखना, जानकारी को समझना और सोच-समझकर प्रतिक्रिया देना भी एक तरह की आधुनिक साक्षरता है।
अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर टॉप 10 कोट्स
1.किताब हाथ में हो तो रास्ते खुलते हैं,
ज्ञान साथ हो तो फैसले बदलते हैं।
अक्षर छोटे जरूर दिखाई देते हैं,
पर जिंदगी को बड़ा बना देते हैं।
2.
पढ़ना सिर्फ शब्दों को समझना नहीं,
दुनिया को नए नजरिए से देखना है।
एक अक्षर से शुरू हुआ सफर,
कई सपनों तक पहुंच सकता है।
3.
जिस हाथ में किताब होती है,
उसमें उम्मीद भी होती है।
ज्ञान जब साथ चलता है,
तो मुश्किल राह भी आसान होती है।
4.
साक्षरता आवाज देती है,
अपने हक को पहचानने की।
यह हिम्मत देती है इंसान को,
अपने फैसले खुद लेने की।
5.
अक्षर ज्ञान की पहली सीढ़ी हैं,
सवाल उसकी अगली उड़ान।
जो सीखना कभी नहीं छोड़ता,
वही बनाता है अपनी पहचान।
6.
एक बच्चा पढ़ता है तो सिर्फ,
एक भविष्य नहीं बदलता।
उसकी सीख से धीरे-धीरे,
पूरा परिवार आगे बढ़ता है।
7.
किताबों की रोशनी ऐसी है,
जो बांटने से कम नहीं होती।
जितना ज्ञान आगे बढ़ता है,
उतनी ही दुनिया बेहतर होती है।
8.
साक्षर होना मतलब यह भी है,
कि हर बात पर सवाल करें।
सही जानकारी को पहचानें,
और सोचकर अपना फैसला करें।
9.
उम्र सीखने की राह में,
कभी दीवार नहीं बन सकती।
जिस दिन मन सीखना चाहे,
उस दिन नई शुरुआत हो सकती है।
10.
हर बच्चे तक किताब पहुंचे,
हर हाथ में सीखने का अधिकार हो।
साक्षर समाज तभी बनेगा,
जब शिक्षा सबके लिए समान हो।
अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस केवल एक तारीख याद रखने का दिन नहीं है। यह सोचने का मौका है कि, अगर हम किसी को पढ़ना सिखा सकते हैं, किसी बच्चे को किताब दे सकते हैं या किसी बुजुर्ग को जरूरी जानकारी समझा सकते हैं, तो यही इस दिन की सबसे अच्छी शुरुआत हो सकती है।
