जब 169 साल पहले आज के ही दिन देश में पहली बार हुई थी 'हिंदू विधवा' की शादी

इस विवाह के बाद बंगाल में हंगामा मच गया। रूढ़िवादी लोग विद्यासागर के विरोध में उतर आए। उनके घर पर पत्थर फेंके गए। लेकिन दूसरी तरफ राजा दक्षिणारंजन मुखर्जी, देवेंद्रनाथ टैगोर जैसे बड़े लोग समर्थन में उतरे। धीरे-धीरे विरोध शांत हुआ और विधवा पुनर्विवाह को सामाजिक स्वीकृति मिलती गई।

Hindu Widow Remarriage: आज 7 दिसंबर है। साल 1856 में आज की ही तारीख पर कोलकाता के एक साधारण घर में एक ऐसी घटना हुई जिसने भारतीय समाज की सैकड़ों साल पुरानी रूढ़ियों को चुनौती दी। 11 साल की ईश्वरचंद्र विद्यासागर की पहल पर 10 साल की विधवा कालिमती ने श्रीचंद्र विद्यारत्न से हिंदू रीति-रिवाज से दूसरा विवाह किया। यह भारत में विधवा पुनर्विवाह का पहला दर्ज इतिहास है जिसे कानून और समाज दोनों ने स्वीकार किया।

Hindu Widow Remarriage

7 दिसंबर 1856 को देश में हुई थी पहली हिंदू विधवा की शादी (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pexels)

उस दौर की काली सच्चाई

19वीं सदी के भारत में विधवा का जीवन नरक से बदतर था। 10-12 साल की उम्र में ही बाल-विवाह हो जाता था और पति की मौत के बाद विधवा को सिर मुंडवाना, सफेद साड़ी पहनना और जीवनभर उपवास-तप करना पड़ता था। सती प्रथा 1829 में ही बंद हो चुकी थी, लेकिन उसके बाद भी समाज में विधवाओं का जीते जी मरना जारी था।

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