एक लड़की, दो हाथ और सामने पूरा सिस्टम: जब डर को दरकिनार कर, प्रतिरोध की सबसे मजबूत आवाज बनीं बेटियां

किसी भी आंदोलन की असल ताकत उसकी सामाजिक मान्यता और नैतिक विश्वसनीयता में होती है। शायद यही वजह है कि जब-जब देश की बेटियों ने किसी आंदोलन को अपने प्रतिरोध से संवारा, उसने निर्णायक रुख ले लिया।

बारिश हो रही थी। मुंबई के शिवाजी पार्क के बाहर पुलिस की एक वैन धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी। भीतर वो छात्र थे जिन्हें प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। तभी एक लड़की अचानक वैन के सामने आकर खड़ी हो गई। दोनों हाथ फैलाकर। बिना किसी हथियार के। बिना किसी राजनीतिक पद के। बिना इस भरोसे के कि अगले पल क्या होगा।

Delhi Protest

वो महिलाएं जो बनीं प्रतिरोध की सबसे मजबूत आवाज

उस लड़की का नाम रिया अहिर है। वह न तो उस आंदोलन की नेता थी और न ही किसी छात्र संगठन की पदाधिकारी। लेकिन उस क्षण उसने सिर्फ एक सवाल पूछा- क्या नागरिक होने का मतलब केवल तमाशा देखना है? जब उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उसने रास्ता छोड़ने से इनकार कर दिया। कुछ देर के लिए एक युवती और राज्य की पूरी मशीनरी आमने-सामने खड़ी थी। यही तस्वीर कुछ ही घंटों में पूरे देश में प्रतिरोध की नई पहचान बन गई।

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