Indian Navy Motto: 'शं नो वरुणः' कैसे बना भारतीय नौसेना का मोटो, जानिए क्यों खास है यह मंत्र

Indian Navy Day 2025: शं नो वरुणः को तैत्तिरीय उपनिषद (भृगु वल्ली) से लिया गया है। मूल श्लोक है: 'ऊं शं नो मित्रः शं वरुणः, शं भवत्वर्यमा। शं नो इन्द्रः बृहस्पतिः, शं नो विष्णुरुरुक्रमः'। इसका अर्थ है- देवता ‘मित्र’ हमारे लिए कल्याणकारी हों, वरुण कल्याणकारी हों। ‘अर्यमा’हमारा कल्याण करें। हमारे लिए इन्द्र एवं बृहस्पति कल्याणप्रद हों। ‘उरुक्रम’ (विशाल डगों वाले) विष्णु हमारे प्रति कल्याणप्रद हों।

Indian Navy Day 2025: भारतीय नौसेना का मोटो है- शं नो वरुणः। संस्कृत का यह मंत्र समुद्र की विशालता, प्राचीन वैभव और आधुनिक सैन्य शक्ति को दर्शाता है। इसका अर्थ है - जल एवं महासागरों के देव वरुण, हमारे लिये कल्याणकारी हों। यह मोटो नौसेना के चिन्ह(Logo) पर अंकित है और समुद्री सीमाओं की रक्षा करने वाले नौसेना के वीर जवानों के लिए प्रेरणा स्रोत है। यह मोटो इस बात की भी तस्दीक करता है कि वैदिक काल से चली आ रही परंपरा आज भी नौसेना को अपनी जड़ों से जोड़ती है। आइए जानते हैं आखिर कैसे संस्कृत का यह मंत्र बन गया नौसेना का मोटो।

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इडियन नेवी का मोटो: शं नो वरुण: (Photo: Freepik)

समुद्र के देवता वरुण

हिंदू धर्मग्रंथों में वरुण को जल और महासागरों का देवता माना गया है। ऋग्वेद (1500 ईसा पूर्व से 500 ईसा पूर्व) में वरुण का पहला उल्लेख मिलता है, जहां उन्हें समुद्री मार्गों का ज्ञाता और तूफानों का नियंत्रक कहा गया है। ऋग्वेद (1.25.7) में वर्णन है कि वरुण देव नाविकों और समुद्र से जीविका चलाने वाले लोगों की रक्षा करते। समुद्र में उतरने से पहले नाविक वरुण देव के स्तुति मंत्र का जाप करते थे। कौन जानता था वही जप मंत्र आगे चलकर नौसेना के मोटो का आधार बनेगा।

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