Davos Indian Dishes: विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक के दौरान बर्फ से ढके स्की रिसॉर्ट शहर दावोस में भारतीय स्वाद की भी खास मौजूदगी देखने को मिली। दुनिया भर से आए राष्ट्राध्यक्षों, उद्योगपतियों, नीति-निर्माताओं और विचारकों के बीच भारतीय खाने का स्वाद एक अलग ही पहचान बना रहा है। वैश्विक नेता एवं प्रतिनिधि मसाला चाय, समोसे, पकौड़े, पराठे और खिचड़ी का स्वाद लेने के लिए रुकते नजर आए। भारतीय व्यंजनों में बिरयानी और विभिन्न प्रकार की मसालेदार सब्जियां भी शामिल थीं जिन्हें चखने के लिए बड़ी संख्या में भारतीयों के साथ विदेशी नागरिक भी जुटे।
WEF की बैठक में छाया भारतीय स्वाद
टाटा समूह ने कांग्रेस सेंटर की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर अपने लाउंज के पास- चाय सेंट्रल नाम से एक चाय स्टॉल लगाया, जहां राहगीरों को चाय परोसी गई। इसके पास ही एचसीएल टेक ने भी चाय और कॉफी का स्टॉल लगाया।
मुख्य सड़क प्रोमेनेड के दूसरे छोर पर 'अक्षय पात्र' ने मुफ्त में गर्म खिचड़ी वितरित की, जिसे लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे थे।
पहली बार एक भारतीय फूड ट्रक- कुमार इंडियन फूड भी प्रोमेनेड पर लगाया गया, जहां समोसे, पकौड़े, चावल, रोटियां और शाकाहारी तथा मांसाहारी करी बेची गईं। इस फूड ट्रक पर चीनी, स्विस और अन्य व्यंजन बेचने वाले आसपास के ट्रकों की तुलना में अधिक ग्राहक देखे गए।
भारतीय मंडप के भीतर कई केंद्रीय मंत्रालयों और 10 भारतीय राज्यों के स्टॉल लगे थे और वहां पर गर्म भारतीय भोजन और पेय परोसे जा रहे थे। यहां पर समोसे, टिक्का, चाय, कॉफी, चावल, रोटियां, पराठे, करी और बिरयानी मिल रही थी।
ये जानना बेहद जरूरी है कि भारतीय खाने की एक बड़ी खासियत यह भी है कि यहां शाकाहारी विकल्पों की भरमार है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब प्लांट-बेस्ड डाइट को बढ़ावा मिल रहा है, और भारतीय भोजन इस ट्रेंड में बिल्कुल फिट बैठता है। पनीर की डिशेज, दाल, सब्जियां, छोले, राजमा, इडली, डोसा जैसे व्यंजन विदेशी मेहमानों के लिए ना सिर्फ स्वादिष्ट बल्कि हल्के और हेल्दी विकल्प भी साबित होते हैं।
भारतीय कंपनियों के अन्य लाउंज में भी इसी तरह भारतीय खानपान की व्यवस्था की गई, जिससे डब्ल्यूईएफ के दौरान भारत की सांस्कृतिक और पाक उपस्थिति प्रमुख रूप से उभरकर सामने आई। बता दें कि स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित होने वाली वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की सालाना बैठक राजनीति, अर्थव्यवस्था और वैश्विक नीतियों की चर्चा का मंच तो होती है। लेकिन, अब यह अलग-अलग देशों की संस्कृति, पहचान और सॉफ्ट पावर दिखाने का भी बड़ा अवसर बन चुकी है।
(इनपुट: IANS)
