लेट सोना-लेट उठना पड़ सकता है सेहत पर भारी, जानिए सोशल जेटलैग से कैसे घटती है प्रोडक्टिविटी

How Social Jetlag And Insomnia Reduce Productivity: क्या आप भी रोज देर से सोते और देर से उठते हैं? अगर हां, तो यह आदत आपकी सेहत और काम करने की क्षमता दोनों पर भारी पड़ सकती है। सोशल जेटलैग और अनिद्रा की वजह से प्रोडक्टिविटी सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। चलिए जानते हैं कैसे बिगड़ा स्लीप पैटर्न शरीर, दिमाग और कामकाज पर नकारात्मक असर डालता है।

How Social Jetlag And Insomnia Reduce Productivity: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में देर रात तक मोबाइल चलाना, ओटीटी देखना या काम में लगे रहना आम बात हो गई है। फिर सुबह देर से उठना भी हमारी आदत में शामिल हो गया है। देखने में यह मामूली लग सकता है, लेकिन यही आदत आगे चलकर सेहत और कामकाज दोनों के लिए भारी पड़ सकती है। त्सुकुबा विश्वविद्यालय (University of Tsukuba) के रिसर्चर्स का कहना है कि सोशल जेटलैग और अनिद्रा से जूझ रहे लोगों में प्रोडक्टिविटी लॉस सबसे ज्यादा देखा गया है। यानी शरीर तो घर पर होता है, लेकिन दिमाग पूरी तरह काम के मूड में नहीं आ पाता।

क्या है सोशल जेटलैग

क्या है सोशल जेटलैग

क्या है सोशल जेटलैग और क्यों बढ़ रहा?

सोशल जेटलैग तब होता है, जब हमारे सोने-जागने का समय हफ्ते के कामकाजी दिनों और छुट्टी के दिनों में अलग-अलग हो जाता है। जैसे वीकडेज में जल्दी उठना और वीकेंड पर देर तक सोना। रिपोर्ट के अनुसार, यह गड़बड़ स्लीप पैटर्न शरीर की नेचुरल बॉडी क्लॉक को बिगाड़ देता है। धीरे-धीरे शरीर थकान महसूस करने लगता है और नींद पूरी होने के बावजूद फ्रेशनेस नहीं आती।

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