Causes And Prevention of Knee Pain in Winter: सर्दियों का मौसम एक ओर राहत और सुकून वाला दिखता है, वहीं दूसरी ओर यह जोड़ों खासतौर पर घुटनों के लिए परेशानी का कारण भी बन जाता है। जैसे-जैसे तापमान कम होता है, वैसे-वैसे घुटनों में दर्द और सूजन की शिकायतें बढ़ने लगती हैं। ज्यादातर लोग इसे उम्र और मौसम का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही आपका आगे चलकर चलना-फिरना तक मुश्किल कर सकती है। इसलिए ठंड के मौसम में घुटनों का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं सर्दियों में क्यों जरूरी है घुटनों की देखभाल...
सर्दियों में घुटनों के दर्द की वजह और उपचार
घुटनों पर क्यों पड़ता है ठंड का असर?
सर्दियों में तापमान कम होने से शरीर की मांसपेशियां और लिगामेंट्स सिकुड़ जाते हैं। जिससे शरीर में ब्लड फ्लो भी धीमा हो जाता है। इससे घुटनों में ब्लड फ्लो कम होने लगता है, जिससे दर्द और सूजन की समस्या होने लगती है। वहीं ऐसे लोग जिन्हें ऑस्टियोअर्थराइटिस की समस्या है उनके लिए यह मौसम ज्यादा परेशानी का कारण बनता है।
बढ़ सकती है समस्या
यदि आपको सर्दियों में घुटनों का दर्द लगातार बना हुआ है और चलने-फिरने में भी समस्या होने लगी है, तो आपको इसे गंभीरता से लेना चाहिए। क्योंकि इस तरह धीरे-धीरे कार्टिलेज कमजोर होने लगते हैं और सूजन बढ़ने लगती है। यदि समय रहते स्थिति को कंट्रोल न किया जाए तो क्रॉनिक पेन और मूवमेंट में बाधा की वजह बन सकती है।
ये आदतें हैं जिम्मेदार
ठंड में लोग अक्सर लोग फिजिकल एक्टिविटी को कम कर देते हैं। जिसमें वह घंटों तक एक जगह कंबल में छुपे बैठे रहते हैं। इसके अलावा ठंड में लंबे समय घुटने मोड़कर बैठे रहना भी आपके घुटनों में दर्द का कारण बन जाता है। इसके अलावा जमीन पर पालथी लगाकर बैठना भी सर्दियों में घुटनों के दर्द का एक बड़ा कारण बनता है।
कैसे होगा बचाव?
सर्दियों में घुटनों को गर्म रखना सबसे आसान और असरदार उपाय है। गर्म कपड़े पहनना नी-कैप या वूलन स्लीव्स का इस्तेमाल करने से भी घुटनों के आसपास का तापमान सामान्य बना रहता है। इसके अलावा सुबह और रात में हल्दी गर्म सिकाई भी आपको सूजन और दर्द में राहत दिला सकती है। वहीं रोजाना 15-20 मिनट की हल्दी एक्सरसाइज भी आपके घुटनों की फ्लेक्सिबिलिटी को बेहतर बनाकर दर्द की संभावना को कम कर देती है।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
