1577 में आज ही के दिन बसा था अमृतसर, जानिए सिख गुरु रामदास ने क्यों बसाई थी ये जगह

अमृतसर की स्थापना का उद्देश्य इंसानियत को एक नया ठिकाना देना था। गुरु रामदास जी ने यहां संतोषसर और अमृतसर नाम से दो पवित्र सरोवरों की खुदाई का काम शुरू करवाया था।

सोचिए, आज जिस स्वर्ण मंदिर की चमक पूरी दुनिया को अपनी ओर खींचती है और जहां हर दिन लाखों लोग बिना किसी भेदभाद के लंगर छकते हैं, उसकी नींव रखने का सफर कैसा रहा होगा? आज से सदियों पहले, साल 1577 में सिखों के चौथे गुरु, गुरु रामदास जी ने एक ऐसी पावन नगरी की नींव रखी थी, जो आज इतिहास, अध्यात्म और मेहमाननवाजी की सबसे बड़ी मिसाल बन चुकी है। आइए, वक्त के पहिए को पीछे घुमाते हैं और जानते हैं कि कैसे अस्तित्व में आया हमारा प्यारा अमृतसर।

Amritsar

किसने और क्यों बसाया था अमृतसर (Photo: Incredible India)

संत हृदय और दूरदर्शी सोच के धनी थे गुरु रामदास

सिखों के चौथे गुरु, गुरु रामदास जी, जिन्हें पहले भाई जेठा जी के नाम से जाना जाता था, बेहद शांत, विनम्र और सेवाभावी स्वभाव के इंसान थे। उनके भीतर आध्यात्मिक गहराई के साथ-साथ भविष्य की एक बहुत ही खूबसूरत दूरदर्शिता थी। वे एक ऐसी जगह बनाना चाहते थे जहां जाति, ऊंच-नीच, अमीर-गरीब और धर्म के सभी बंधन टूट जाएं। एक ऐसी पावन भूमि जहां इंसान केवल इंसान बनकर आए और ईश्वर की भक्ति में सराबोर हो जाए। इसी सोच के साथ उन्होंने एक नए नगर की स्थापना का बीड़ा उठाया।

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