कभी शाही शान और रुतबे की थी निशानी, महलों की छांव से आम आदमी की हथेली तक कैसे पहुंची छतरी

History of Umbrella in India: प्राचीन भारत में छत्र केवल शाही परिवारों, ऋषियों या उच्च वर्गों के लिए आरक्षित था। यह केवल धूप या बारिश से बचने का साधन नहीं, बल्कि सत्ता और प्रतिष्ठा का प्रतीक था।

History of Umbrella: देशभर के ज्यादातर इलाकों में मानसून दस्तक दे चुका है। दफ्तर हो या बाजार, इस मौसम में हर जगह आपको छतरी जरूर दिखाई देगी। वैसे भी बारिश हो या धूप, छतरी हमारे जीवन का एक सहज हिस्सा बन गई है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि छतरी कभी केवल शाही प्रतिष्ठा का प्रतीक हुआ करती थी। आइए जानते हैं कि भारत में छतरी का सफर महलों की छांव से शुरू होकर आम आदमी की हथेली तक कैसे पहुंचा।

History of Umbrella in India

भारत में छतरी का इतिहास (History of Umbrella in India)

सत्ता और ताकत का प्रतीक थी छतरी

छतरी शब्द संस्कृत के छत्र से निकला है। इसका अर्थ है छाया देने वाला। प्राचीन भारत में छत्र केवल शाही परिवारों, ऋषियों या उच्च वर्गों के लिए आरक्षित था। यह केवल धूप या बारिश से बचने का साधन नहीं, बल्कि सत्ता और प्रतिष्ठा का प्रतीक था। ऐतिहासिक ग्रंथों और मंदिरों की मूर्तियों में भी हम देख सकते हैं कि राजा के सिर पर सजे छत्र को उनकी शक्ति और दैवीय अधिकार का प्रतीक माना जाता था। अशोक के शिलालेखों से लेकर गुप्तकाल की मूर्तिकला तक, छत्र को राजचिन्ह के तौर पर दर्शाया गया है।

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