आयुर्वेद की अमूल्य विरासत है ये देसी जड़ी-बूटी, सेहत की कई समस्याओं का है पक्का इलाज

हमारे देश में अनेक तरह की जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल रोगों के उपचार में किया जाता है। वहीं कुछ जड़ी-बूटियां तो इसका साधारण हैं कि इनका सेवन तो आम जनमानस में काफी प्रचलित है। ऐसी ही एक आयुर्वेदिक औषधि का नाम है हरीतकी जिसे आम लोग हरण या हर्र के नाम से जानते हैं। आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में...

भारत भूमि पर कुछ औषधियां ऐसी भी हैं, जिन्हें 'संजीवनी' कहा जा सकता है। इन्हीं में से एक है हरीतकी, जिसे संस्कृत में "अभया" कहा गया है। आयुर्वेद में हरीतकी को औषधीय गुणों का खजाना माना गया है; इसे हरण या हर्र भी कहते हैं। इसमें विटामिन-सी, विटामिन-के, मैग्नीशियम, अमीनो एसिड, फ्लेवेनॉइड और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह ब्लड शुगर कंट्रोल करने, पाचन सुधारने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है। यह फल भारत और दक्षिण एशिया के कई क्षेत्रों में पाया जाता है और इसका वैज्ञानिक नाम टर्मिनलिया चेबुला है। जिसका उपयोग आयुर्वेद में हजारों वर्षों से किया जा रहा है। इसके फल सूखे होते हैं और इन्हें चूर्ण, काढ़ा और गोली के रूप में प्रयोग किया जाता है।चरक संहिता में इसे "कषाय" (कसैला) माना गया है, जबकि सुश्रुत संहिता में इसे "त्रिफला" में शामिल किया गया है।

benefits of haritiki

पाचन होगा दुरुस्त

सुश्रुत संहिता के अनुसार, हरीतकी का उपयोग मुख्य रूप से पाचन, श्वसन, त्वचा और मूत्र संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे लोगों के लिए किया जाता है। इसके चूर्ण का उपयोग बवासीर के लक्षणों को कम करने में मदद करता है; सूजन कम होती है और दर्द में भी राहत मिलती है।

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