सच या सिर्फ दिमाग का वहम? हार्वर्ड एक्सपर्ट से जानिए कैसे हमारी मान्यताएं तय करती हैं हमारी हकीकत

हार्वर्ड से शिक्षित मनोचिकित्सक डॉ. कविता सन का मानना है कि हर इंसान अपनी एक अलग हकीकत गढ़ता है और इसी हकीकत को आकार देने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती हैं हमारी बुनियादी मान्यताएं

हम सब बचपन से यही मानते आए हैं कि दुनिया वैसी ही है जैसी हमें दिखती है। जो हम सुनते हैं, देखते हैं या महसूस करते हैं, वही सच्चाई या वास्तविकता है। लेकिन क्या हो अगर आपसे कहा जाए कि आपकी दुनिया की सच्चाई आपकी अपनी ही सोच और मान्यताओं का एक भ्रम मात्र है?

Reality vs Illusion

क्या हकीकत जैसा कुछ नहीं होता? (Photo: iStock)

हार्वर्ड से शिक्षित मनोचिकित्सक डॉ. कविता सन का मानना है कि ऑब्जेक्चिव रियालिटी जैसा कुछ नहीं होता। हर इंसान अपनी एक अलग हकीकत गढ़ता है और इसी हकीकत को आकार देने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती हैं हमारी बुनियादी मान्यताएं (Core Beliefs)।

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