New Year Poem Dr Kumar Vishwas: नए साल पर एक दूसरे को बधाई संदेश भेजे जाते हैं। लोग अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और करीबियों को नए साल की शुभकामनाएं फेसबुक, वाट्सऐप और इंस्टाग्राम के माध्यम से देते हैं। वहीं कुछ लोग कविताओं के जरिए Happy New Year बोलना पसंद करते हैं। देश के तमाम कविओं ने नए साल पर आशा से भरी कविताएं लिखी हैं। आज हम आपको डॉ. कुमार विश्वास की नववर्ष की कविता बता रहे हैं जिसका अर्थ गहरा है। डॉ. कुमार विश्वास की ये कविता काफी फेमस है और मंच पर इसकी काफी फरमाहिश होती है।
कविता के जरिये कुमार विश्वास की न्यू ईयर विश
“इस साल न हो पुर-नम आँखें, इस साल न वो खामोशी हो
इस साल न दिल को दहलाने वाली बेबस-बेहोशी हो
इस साल मुहब्बत की दुनिया में, दिल-दिमाग की आँखें हों
इस साल हमारे हाथों में आकाश चूमती पाँखें हों
ये साल अगर इतनी मुहलत दिलवा जाए तो अच्छा है
ये साल अगर हमसे हम को, मिलवा जाए तो अच्छा है
चाहे दिल की बंजर धरती सागर भर आँसू पी जाए
ये साल मगर कुछ फूल नए खिलवा जाए तो अच्छा है
ये साल हमारी कि़स्मत में कुछ नए सितारे टाँकेगा
ये साल हमारी हिम्मत को कुछ नई नज़र से आँकेगा
इस साल अगर हम अम्बर से दुःख की बदली को हटा सके
तो मुमकिन है कि इसी साल हम सब में सूरज झाँकेगा।”
Dr Kumar Vishwas New Year Poem
खुद शेयर की थी कुमार विश्वास ने ये कविता
लोकप्रिय कवि कुमार विश्वास ने इस कविता को खुद कई बार सोशल मीडिया पर शेयर किया है। मंच पर वो इस कविता को जब सुनाते हैं तो दर्शक भावुक हो जाते हैं। इस कविता में कसक के साथ उम्मीद हैं। जो बीत गया जो ठीक लेकिन आने वाला वक्त रोशनी से सराबोर होगा।
