आनंद कौशल की 'हमनशीं'- दिल से निकली ग़ज़लें, इंसानी जज़्बातों का सजीव आईना

ग़ज़ल के शौकीनों के लिए किताब की शक्ल में नई सौगात आई है। हमनशीं नाम की इस किताब में इंसानी जज्बातों को बेहद खूबसूरती से उतारा गया है। पत्रकार और लेखक मधुप मणि 'पिक्कू' ने हमनशीं की समीक्षा की है।

हमनशीं आनंद कौशल का पहला ग़ज़ल एवं शायरी संग्रह है। इसे पढ़कर पाठकों को सबसे अच्छी बात यह लगेगी कि इसमें ज़्यादातर ग़ज़ल और शायरी सीधे दिल से निकले हुए लगते हैं। भाषा बिल्कुल आसान है, इसलिए हर ग़ज़ल को आसानी से समझ सकते है। कहीं भी शब्दों में बनावटीपन नहीं दिखता, बल्कि ऐसा महसूस होता है कि शायर ने हर पढ़ने वालों के जीवन के एहसासों को ही शब्दों में ढाल दिया है।

Hamnasheen

सादगी में डूबे जज़्बातों की बेमिसाल किताब – 'हमनशीं'

किताब में मोहब्बत, जुदाई, याद, दर्द और रिश्तों की भावनाओं को बहुत सादगी से लिखा गया है। कई ग़ज़ल ऐसी हैं जो पढ़ते ही मन में उतर जाती हैं और देर तक याद रहती हैं। यह सिर्फ ग़ज़ल की किताब नहीं, बल्कि इंसानी जज़्बातों का एक खूबसूरत आईना है। शायरी तो ऐसे हैं कि हर महबूब को आशिक और आशिक को महबूब का दीदार करा दे।

End of Feed