Guru Ravidas Jayanti 2026: गुरु रविदास जयंती आज, यहां पढ़ें संत रविदास जी के ये अनमोल विचार, मन चंगा तो कठौती में गंगा..

Guru Ravidas Ji Ke Anmol Vachan (गुरु रविदास जी के अनमोल वचन): आज गुरु रविदास जी की जयंती मनाई जा रही है। काशी में जन्मे इस संत ने अनमोल वचन से जाति-भेद, ऊंच-नीच और सामाजिक असमानता को दूर कर समानता का ज्ञान दिया है। रविदास जी के वचन आज भी लोगों को जागरूक करते हैं, प्रेरणा देते हैं और आत्मचिंतन करने पर मजबूर करते हैं।

Guru Ravidas Ji Ke Anmol Vachan (गुरु रविदास जी के अनमोल वचन): आज गुरु रविदास जी की जयंती के पावन अवसर पर उन्हें नमन करते हुए कहा जा सकता है कि संत रविदास जी भक्ति आंदोलन के महान संत, समाज सुधारक और मानवता के उपासक थे। उन्होंने अपने जीवन और वाणी से जाति-भेद, ऊंच-नीच और सामाजिक अन्याय का विरोध किया तथा यह संदेश दिया कि ईश्वर के सामने सभी मनुष्य समान हैं। उनके विचार आज भी एक ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जहां कोई दुखी न हो और सबको सम्मान मिले। गुरु रविदास जी की शिक्षाएं आज भी हमें मानवता, भाईचारे और आत्मसम्मान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। यहां से आप गुरु रविदास जी के अनमोल वचन, विचार पढ़ सकते हैं और इसे अपनों संग शेयर भी कर सकते हैं।

गुरु रविदास जी के अनमोल वचन (pc: pinterest)

संत रविदास के अनमोल वचन (Sant Ravidas Anmol Vachan)-

  • हमें हमेशा कर्म में लगे रहना चाहिए और कभी भी कर्म के बदले मिलने वाले फल की आशा नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि कर्म करना हमारा धर्म है तो फल पाना हमारा सौभाग्य है।
  • जहां प्रेम नहीं, वहां नरक है। जहां प्रेम है, वहां स्वर्ग है।
  • मन शुद्ध हो तो हर जगह पवित्रता है।
  • यदि आपमें थोड़ा सा भी अभिमान नहीं है तो निश्चित ही आपका जीवन सफल रहता है, ठीक वैसे ही जैसे एक विशालकाय हाथी शक्कर के दोनों को बिन नहीं सकता, लेकिन एक तुच्छी सी दिखने वाली चींटी शक्कर के दानों को आसानी से बिन लेती है।
  • माता-पिता और गुरु तीनों देवताओं के समान हैं, इनकी सेवा करो और ईश्वर का भजन करो।
  • ऐसा राज्य चाहता हूं जहाँ सभी को भोजन मिले, सब लोग समान रहें और खुश रहें।
  • प्रेम ही सब कुछ है, प्रेम ही ईश्वर है।
  • यह संसार असत्य है, केवल ईश्वर ही सत्य है।
  • जीव को यह भ्रम है कि यह संसार ही सत्य है किंतु जैसा वह समझ रहा है वैसा नहीं है, वास्तव में संसार असत्य है।
  • अगर अच्छा नहीं कर सकते, तो कम से कम दूसरों को नुकसान न पहुचाएं। अगर फूल नहीं बन सकते हैं, तो कम से कम कांटे न बनें।

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