Ghevar Sweet (घेवर के बारे में जानकारी): स्कूल के दिनों में जब बहुत ज्यादा बारिश की वजह से छुट्टी हो जाती थी तो अक्सर टाइम पास करने के लिए पहेलियां बूझने का खेल खेला जाता था। उसी वक्त की एक पहेली मुझे अभी तक याद है -
घेवर कैसे बना सावन का जेवर, क्या है कहानी, कैसे करें स्टोर (Pic : Canva)
घी-मैदा से बनी, दिखूं जैसे जाल,
मीठी चाशनी में नहाकर बनूं बेमिसाल,
सावन-तीज में होती हूं खास,
राजस्थान की मिठाई, सबको करती हूं पास,
बोलो कौन हूं मैं मिठास?
अब मानसून सीजन है और अपने लेख की थीम भी हम खोल ही चुके हैं - जो जवाब है घेवर जो कहलाता है सावन का जेवर। उस समय जवाब के बताने से लेकर अब तक - घेवर की लोकप्रियता बढ़ती ही गई है। सावन की पहली फुहारों के साथ ही भादो के महीने के अंत होने तक घेवर के गोल-गोल टिक्के जीभ को ललचाते रहते हैं। पहले तो सादा जालीदार घेवर ही सावन की शान हुआ करता था लेकिन अब तो चॉकलेट, पान फ्लेवर तक के घेवर खाए-खिलाए जाते हैं।
यहां की पॉपुलर मिठाई है घेवर
घेवर का ऑरिजिन ऐसे तो राजस्थान माना जाता है। लेकिन अब ये हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली के क्षेत्र में भी बहुत पॉपुलर है। बेटी के घर तीज का नेग भेजना हो या फिर सावन में किसी से मिलने जाना हो, मेहमानों का स्वागत करना हो - घेवर खूब बांटा, खाया और खिलाया जाता है। इसकी वैराइटी और प्राइस, रेसिपी के बारे में आगे बात करते हैं। पहले जानें कि घेवर को सबसे पहले किसने बनाया था।
घेवर को सबसे पहले किसने और कहां बनाया था
घेवर राजस्थान की पारंपरिक मिठाई है जिसके बारे में सोच लिया तो जब तक जीभ को इसकी मिठास का स्वाद नहीं मिलेगा, तब तक खाने को मन ललचाता रहेगा। हां, यह बात और है कि इस मिठाई के इतिहास को खंगालने पर एकदम स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन गूगल पर उपलब्ध जानकारी और फूड एक्सपर्ट्स की राय में घेवर सबसे पहले जयपुर के राजघरानों की रसोई में बनाया गया था। हालांकि कुछ इस रेसिपी को खोजने का श्रेय जोधपुर के शाही रसोइयों को भी देते हैं। इसे बनाने का तर्क कोई नई मिठाई को तैयार करने का रहा होगा - जो लंबे समय तक रखे जाने पर भी बारिश के मौसम में खराब न हो और खाने में भी स्वादिष्ट और मुलायम रहे।
समय के साथ यह शाही मिठाई महलों की रसोई से निकलकर आम जनता तक पहुंच गई और अपनी रेशमी मिठास लिए आम लोगों के बीच सावन की शान बनकर छा गई। हालांकि यह भी जरूर होगा कि तब से लेकर अब तक घेवर के स्वाद का रूप और स्वरूप - बहुत ही बदल गया है।
घेवर को यह नाम कैसे मिला
घेवर शब्द को दरअसल घृतपूर नाम की मिठाई से निकला माना जाता है। घृत हुआ घी और पूर हुआ पूरा या भरा हुआ। घृतपूर मिठाई का अर्थ हुआ घी से भरी हुई। घृतपूर नाम घेवर की खास बनावट और इसमें घी के ज्यादा इस्तेमाल को दर्शाता है।
कौन से फ्लेवर हैं हिट, फ्यूजन भी डिमांड में फिट
दिल्ली के एक प्रसिद्ध स्वीट ब्रैंड से जुड़े हरविंदर चौधरी बताते हैं कि घेवर पहले पहल सादा ही आया करता था। बनाने की तकनीक के आधार पर ये सफेद से हल्के सुनहरे रंग का होता था। लेकिन अक्सर ये कड़ा हो जाता था जिससे जीभ छिलने की शिकायत भी आती थी। इस बीच शहरों के हलवाइयों ने मलाई घेवर या मावा घेवर जैसे विकल्प लोगों को दिए लेकिन मार्केटिंग, सही कस्टमर की पहचान की वजह से ये उतने लोकप्रिय नहीं हुए।
घेवर के फ्लेवर और तेवर को नया ट्विस्ट तब मिला जब छोटे हलवाइयों से हटकर बड़े स्वीट ब्रैंड्स ने इसको अलग-अलग स्वाद और आकारों में अपनी दुकानों पर सजाने और पैकेजिंग के साथ बेचने का ट्रेंड शुरू किया। इसी के साथ ही सादे घेवर की पूछ थोड़ी कम हो गई और अब मलाई/खोया की परत वाला मावा घेवर, रबड़ी और ड्राई फ्रूट्स से सजा रबड़ी घेवर, केसर चाशनी से तैयार केसरिया घेवर और ड्राई फ्रूट से सजा मेवा घेवर ज्यादा डिमांड में रहता है। हालांकि इन दिनों चॉकलेट घेवर, पान घेवर के साथ ही रसमलाई घेवर, गुलाब जामुन घेवर जैसे फ्यूजन घेवर भी पसंद किए जा रहे हैं।
कस्टमर्स की पसंद भी बदली
हरविंदर का कहना है कि वक्त के साथ घेवर खरीदने के तरीके में भी बदलाव आ गया है। पहले लोग पूरा गोल टिक्का ज्यादा खरीदते थे तो वैसे ही बड़े-बड़े घेवर बनते भी थे। लेकिन अब लोग एक ही किलो में कई फ्लेवर्स चखना चाहते हैं। तो हम 250 ग्राम तक के घेवर का एक पीस तैयार करते हैं। और पैकेजिंग में दो से चार फ्लेवर तक एक ही डिब्बे में देते हैं। तीज, रक्षा बंधन जैसे त्योहारों पर ऐसी पैकिंग की बहुत डिमांड रहती है।
स्वाद ही नहीं आकार भी बदला
समय के साथ घेवर का आकार भी खूब बदला है। पहले जहां गोल जालीदार शेप इसकी पहचान थी, वहीं अब ये चौकार, आयाताकार, तिकोण और यहां तक कि दिल के आकार में भी मिल रहा है।
दाम में भी शाही है घेवर
घेवर को अगर राजघरानों के स्वाद के अनुसार तैयार किया गया था, तो आज भी इसकी कीमत शाही ही है। ठीक-ठाक मिठाई की दुकान का देसी घी में बना सादा घेवर आपको 500 रुपये किलो से मिलेगा। वहीं अगर मावा, मेवा, मलाई, रबड़ी, चॉकलेट जैसे फ्लेवर पर जाते हैं तो कीमत स्वाद और दुकान के नाम के आधार पर यही मिठाई आपको 1000 रुपये से 1500 रुपये किलो के रेट में मिलेगी।
दाम के इतने हाई होने के बारे में पूछने पर रोहिणी के एक पुराने मिठाई के थोक विक्रेता बताते हैं कि घेवर को बनाना कुशल कारीगरी का काम है। अगर थोड़ा भी घेवर जल गया या कम पका तो इसका स्वाद नहीं आएगा। एक तार की चाशनी में अगर ये ठीक से नहीं डूबा तो ये पूरी मिठास नहीं सोखेगा। डिमांड और कुशलता के आधार पर ही इस मिठाई के दाम रखे जाते हैं। वैसे अब मशीने भी आ गई हैं लेकिन माप के लिए तो कुशल और अनुभवी हाथ चाहिए ही। वैसे अगर आप दुकान से हटकर दिल्ली के आसपास के गांवों से घेवर खरीदते हैं तो यहां आपको दाम कम लग सकते हैं।
घेवर कितने समय तक ताजा रहता है
घेवर को बहुत जल्दी खराब होने वाली मिठाई नहीं माना जाता है। घी में सादा घेवर 5 से 7 दिन तक आराम से खाया जा सकता है। हालांकि मावा या खोया वाला घेवर आप फ्रिज में स्टोर करें और एक से दो दिन में ही खा लें। मलाई और रबड़ी फ्लेवर वाला घेवर भी इतना ही चलता है। अगर आप पान, चॉकलेट जैसे फ्लेवर का घेवर खरीदते हैं तो इसे बनाने की तारीख के दो से तीन दिन में इसको भी कंज्यूम कर लें। हालांकि लेते समय दुकान वाले से घेवर के ताजा रहने की निश्चित अवधि पूछना ना भूलें।
हलवाई की दुकान से ताजा घेवर की पहचान कैसे करें
- रंग और बनावट से पहचानें। ताजा घेवर हल्का सुनहरा और थोड़ा चमकदार होता है।
- अगर घेवर बहुत गहरा भूरा रंग का या कहीं से भी सूखा-सिकुड़ा दिख तो ये पुराना हो सकता है।
- ताजे घेवर से देसी घी और हल्की चाशनी की भीनी खुशबू आती है।
- घेवर अगर बासी होगा तो इसमें से तेल या खट्टेपन की गंध आती है। ये तरीका देसी घी और तेल में बने घेवर को पहचानने में भी काम आएगा।
- थोड़ा सा घेवर हाथ पर लेकर देखें। अगर यह हल्का क्रिस्पी होगा तो ताजा होगा। पुराना घेवर नमी पकड़ कर मुलायम हो जाएगा।
- जरा सा घेवर खाकर देखें। बासी होने पर घेवर में तेल की चिकनाहट या जरा खट्टा स्वाद आएगा। ताजा घेवर मुंह में रसीला स्वाद देगा।
घेवर को घर में कैसे स्टोर करें
- बिना चाशनी वाला घेवर एयरटाइट डिब्बे में 4-5 दिन तक फ्रेश रह सकता है। इसे फ्रिज में रखने की जरूरत नहीं है।
- चाशनी वाला घेवर एक दो दिन में ही खा लें। ज्यादा दिन रखने पर यह नरम हो जाता है और स्वाद खो देता है।
- मावा या रबड़ी घेवर लाएं तो उसी दिन खा लें। या एक दिन के लिए फ्रिज में स्टोर करें।
घर पर घेवर कैसे बनाएं
घर पर घेवर बनाने की आवश्यक सामग्री:
- मैदा - 2 कप
- देसी घी - ½ कप (घोलने के लिए)
- बर्फ के टुकड़े - 4-5 बड़े साइज में
- ठंडा पानी - 3 से 4 कप
- दूध - 2 टेबलस्पून
- नींबू का रस - 1 टीस्पून
- बेकिंग पाउडर - ¼ टीस्पून
- घी या रिफाइंड ऑयल - तलने के लिए
चाशनी के लिए आवश्यक सामग्री:
- चीनी - 2 कप
- पानी - 1 कप
- केसर - कुछ धागे (वैकल्पिक)
- इलायची पाउडर - ½ टीस्पून
- गुलाब जल - 1 टीस्पून (वैकल्पिक)
घर पर घेवर बनाने की विधि
- बैटर तैयार करने के लिए एक बड़े बर्तन में आधा कप घी डालें और बर्फ के टुकड़ों के साथ 5-7 मिनट तक फेंटें। इससे घी हल्का और क्रीमी हो जाएगा।
- बर्फ के टुकड़े हटा दें और क्रीमी घी में धीरे-धीरे मैदा और जरूरत के हिसाब से ठंडा पानी डालकर फेंटते जाएं। घोल में गुठली नहीं बनने दें और इसे पतला रखें।
- अब इसमें नींबू का रस, दूध और बेकिंग पाउडर डालकर फिर से अच्छे से मिला लें। बैटर को 10-15 मिनट ढककर रख दें।
- चाशनी बनाने के लिए एक भगौने में 2 कप चीनी और 1 कप पानी डालें। फिर इसे मध्यम आंच पर पकाएं। जब एक तार की चाशनी बन जाए तो गैस बंद कर दें।
- इसमें केसर, इलायची पाउडर और गुलाब जल डालें। ये सब डालने से घेवर का रंग और स्वाद अच्छा आएगा।
- एक भारी तले वाली गहरा पतीला लें और उसमें घी या रिफाइंड ऑयल को गर्म करें। घी मध्यम गर्म होना चाहिए। इसमें घेवर बनाने का सांचा रखें।
- सांचे में घोल को करीब 8-10 इंच ऊपर से गर्म घी में डालें। इसके लिए आप छेद वाली करछी या लंबी नोक वाली प्लास्टिक बोटल की मदद ले सकते हैं।
- धीरे-धीरे बैटर डालें, घेवर अपने आप आकार लेगा। जैसे ही घोल डालेंगे, एकदम झाग उठेगा। ऐसा अच्छा घोल बनने की निशानी है।
- जब झाग खत्म हो जाए, फिर से बैटर डालें। इस प्रक्रिया को 3-4 बार दोहराएंगे तो घेवर की परतें बनती जाएंगी। अब धीमी आंच पर घेवर को सुनहरा होने तक तलें।
- जब घेवर पूरा फ्राई हो जाएगा तो सांचे से अपनेआप ही निकल जाएगा। घेवर को चिमटे की मदद से ध्यान से निकालकर एक जाली पर रखें ताकि अतिरिक्त घी निकल जाए।
- इसके बाद गर्म घेवर को ही हल्की गर्म चाशनी में डुबाएं और फिर तुरंत निकाल लें। इसे ज्यादा चाशनी न सोखने दें।
- घेवर को ड्राई फ्रूट्स, मलाई, रबड़ी आदि से सजाएं और ठंडा होने पर सभी को खिलाएं।
घर पर अच्छा घेवर कैसे बनाएं
- मैदा का घोल गाढ़ा ना रखें। बैटर जितना पतला होगा, घेवर उतना ही झरझरा बनेगा।
- घोल में गुठलियां भी नहीं रहनी चाहिए। इससे घेवर का जाल अच्छा नहीं बनेगा।
- घी बहुत ज्यादा गर्म कर लेने या ज्यादा ठंडा रखने से भी घेवर सही नहीं बनता
- जब बैटर डालते ही झाग उठे, घेवर बनाने के लिए तेल का यही तापमान सही है
- एक साथ या बहुत ज्यादा डाल देने से घेवर का आकार बिगड़ जाता है
Ghevar Recipe Video
और सांचे की भी जानकारी
अगर इसी सावन में घर पर घेवर बनाने का सोच लिया है तो बता दें कि घेवर बनाने के लिए आपको तरह तरह के सांचे दुकानों के अलावा ऑनलाइन भी मिल जाएंगे। इनमें गोल, रेक्टेगंल, चौकार जैसी शेप कई साइज में मिल जाएंगी। नहीं तो छोटे साइज की कड़ाही में भी घेवर को तला जा सकता है।
