सिनेमा को हमेशा समय की बर्बादी मानते थे बापू, जानिए तो फिर क्यों देखनी पड़ी थीं ये दो फिल्में

Gandhi Jayanti 2026: महात्मा गांधी ने अपने जीवन में करीब 14 दिन के अंदर ही दो फिल्में देखी थी। इसमें से एक अमेरिकी फिल्म थी जिसका नाम था मिशन टू मॉस्को और दूसरी राम राज्य नाम की भारतीय फिल्म थी।

Mahatma Gandhi Jayanti 2026: महात्मा गांधी का सारा जीवन सत्य, अहिंसा, सौहार्द, समानता, शिक्षा, स्वराज और राष्ट्रवाद जैसे विचारों के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा। वैसे क्या आप जानते हैं कि सिनेमा को लेकर बापू क्या सोचते? अगर आपको ना पता हो तो बता दें कि बापू हमेशा सिनेमा को समय की ङी बर्बादी मानते थे। 1947 में तो उन्होंने यहां तक कह दिया था कि अगर उनके हाथ में होता तो भारत के सिनेमाघरों को चरखा और हस्तशिल्प के काम की जगहों में बदल देते।

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महात्मा गांधी ने पूरे जीवनकाल में देखी थी महज दो फिल्में, वो भी अधूरी

भारत सरकार द्वारा प्रकाशित 'कलेक्टेड वर्क्स ऑफ महात्मा गांधी' के अनुसार 25 नवंबर 1926 को महात्मा गांधी ने अपने अंग्रेजी वीकली जर्नल यंग इंडिया में साफ लिखा था कि, 'मैं आज तक कभी सिनेमा नहीं गया हूं और न ही इसके प्रति कोई मेरे अंदर कोई उस्ताह या चाह है। मैं फिल्मों में ईश्वर के दिए हुए समय को नष्ट करने से इनकार करता हूं। हालांकि कभी-कभी मेरे कई मित्र और करीबी दबाव भी डालते हैं और कहते हैं कि फिल्मों का शैक्षिक मूल्य है। संभव है कि इसमें ऐसा कुछ हो, लेकिन इसका भ्रष्ट करने वाला प्रभाव रोज मेरे सामने आता है, इसलिए शिक्षा मैं कहीं और से खोज लेता हूं।'

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