कहानी पिनकोड की, कैसे 6 अंकों का यह खास PIN Code बन गया हमारा पता

आज विश्व डाक दिवस (World Post Day) है। इस खास दिन पर आइए समझने की कोशिश करते हैं कि बिना कंप्यूटर और इंटरनेट के दौर में गढ़े गए इन 6 अंकों ने कैसे पूरे भारत के भूगोल को एक सूत्र में पिरो दिया।

मान लिजिए कि आप लद्दाख की बर्फीली वादियों में बैठे हैं और आपको तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में अपने किसी दोस्त को कोई पार्सल या चिट्ठी भेजनी है। दोनों राज्यों की भाषाएं अलग हैं, बोलियां अलग हैं, यहां तक कि लिखने की लिपि भी पूरी तरह जुदा है। गूगल मैप भी कई बार गांव की गलियों में जाकर हाथ खड़े कर देता है। बावजूद इसके आपका पार्सल बिना किसी रुकावट, आपके दोस्त के दरवाजे तक पहुंच जाता है। इसके पीछे छिपा है 6 डिजिट का एक बेहद सीधा-सादा नंबर, जिसे हम सब पिनकोड (PIN Code) कहते हैं।

History of Pincode

कैसे 6 अंकों का एक कोड बन गया हमारे घर का पता (AI Generated and Newsroom Verified Image)

आज विश्व डाक दिवस है। इस खास दिन पर आइए समझने की कोशिश करते हैं कि बिना कंप्यूटर और इंटरनेट के दौर में गढ़े गए इन 6 अंकों ने कैसे पूरे भारत के भूगोल को एक सूत्र में पिरो दिया।

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