सेहत, स्वाद और परंपरा के प्रतीक है मिट्टी के बर्तन, सौंधी खुशबू से लेकर अनोखे स्वाद का सफर

मिट्टी के बर्तनों में बने खाने का स्वाद अनोखा होता है । ये बर्तन सदियों पुराने उस परंपरा का प्रतीक है जहां सौंधी खुशबू से लेकर स्वाद का अनोखा मिलन होता है। खाने का स्वाद ऐसा कि हर कोई बस उंगलियां ही चाटता रह जाए।

नई दिल्ली: चकाचौंध और आधुनिकता की दुनिया में आज किचन में स्टील, नॉन-स्टिक और प्रेशर कुकर जैसे बर्तन आम हो गए हैं। लेकिन, आयुर्वेद और विज्ञान आज एक बार फिर पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों की ओर लौटने की सलाह दे रहा है। मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने और खाने के फायदे न सिर्फ स्वास्थ्य से जुड़े हैं, बल्कि स्वाद और परंपरा की दृष्टि से भी ये काफी महत्वपूर्ण हैं।

CLAY POT

सेहत, स्वाद और परंपरा के प्रतीक है मिट्टी के बर्तन

आयुर्वेद के अनुसार, भोजन को धीमी आंच में पकाना ही सबसे बेहतर तरीका है। मिट्टी के बर्तनों में खाना धीरे-धीरे पकता है, जिससे इसमें मौजूद सभी जरूरी पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। जबकि प्रेशर कुकर में तेज भाप और दबाव के कारण ऐसा नहीं होता है। प्रेशर कुकर में खाना बनने के दौरान 87 फीसदी तक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, लेकिन मिट्टी के बर्तनों में ये 100 फीसदी तक सुरक्षित रहते हैं। साथ ही, भोजन में मौजूद सभी प्रोटीन शरीर को खतरनाक बीमारियों से सुरक्षित रखते हैं।

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