Parenting Tips: बच्चों की दुनिया जितनी रंगीन दिखाई देती है, उतनी ही संवेदनशील भी होती है। कई बार माता-पिता जब उनसे पूछते हैं, "कैसा लग रहा है?" या "स्कूल कैसा था?", तो जवाब सिर्फ एक ही मिलता है- ठीक हूं या सब ठीक है। देखने में यह सामान्य लग सकता है, लेकिन कई बार यही छोटा-सा जवाब बच्चों के मन में छिपी बड़ी भावनाओं का संकेत भी हो सकता है। हर बच्चा अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाता है। ऐसे में माता-पिता का व्यवहार और संवाद का तरीका बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। आज हम आपको बच्चों के लिए 5 टिप्स (Positive Parenting) बताएंगे, जिन्हें फॉलो कर आपके बच्चे आपसे खुलकर बात करेंगे।
परेंटिंग टिप्स
बच्चे क्यों नहीं करते अपने मन की बात
बच्चे अक्सर इस डर से अपनी भावनाएं छिपा लेते हैं कि कहीं उन्हें डांट न पड़े, उनकी बात को गंभीरता से न लिया जाए या फिर कोई उन्हें समझ न पाए। कई बार उन्हें खुद भी यह समझ नहीं आता कि वे कैसा महसूस कर रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि घर का माहौल ऐसा हो, जहां बच्चा बिना किसी डर या झिझक के अपनी बात कर सके। जानते हैं कुछ कारगर तरीके जो आपके और बच्चे के बीच बॉड को मजबूत बनाता है।
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बातचीत का तरीका बदले
आप बच्चों से पूछें कि 'आज स्कूल कैसा था?' जैसे सवालों का जवाब अक्सर 'ठीक था' में खत्म हो जाता है। इसके बजाय ऐसे सवाल पूछें जिनमें बच्चा थोड़ा सोचकर जवाब दे। जैसे - आज की सबसे मजेदार बात क्या थी?, किस बात पर सबसे ज्यादा हंसी आई? आज किसी बात से परेशान हुए? ऐसे सवाल बच्चों को विस्तार से बात करने के लिए प्रेरित करते हैं।
पहले अपनी बातें साझा करें
अगर आप चाहते हैं कि बच्चा खुलकर अपनी बातें बताए, तो शुरुआत अपनेआप से करें। अपने दिन की कोई छोटी-सी घटना, खुशी या परेशानी उसके साथ साझा करें। जब बच्चा देखेगा कि घर में भावनाओं पर खुलकर बात होती है, तो वह भी धीरे-धीरे अपनी बातें साझा करने लगेगा।
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बात के बीच में टोकें नहीं
कई बार माता-पिता बच्चे की बात पूरी होने से पहले ही सलाह देना शुरू कर देते हैं या गलती निकालने लगते हैं। इससे बच्चा अगली बार खुलकर बात करने से बचता है। जब भी बच्चा कुछ कहे, उसे पूरा सुनें, बीच में न रोकें और उसकी भावनाओं को स्वीकार करें। इससे उसे भरोसा मिलेगा कि उसकी बात की अहमियत है।
नो-स्क्रीन टाइम बिताएं साथ
यदि आप चाहते हैं कि आपका बच्चा आपके साथ खुलकर बात करे तो रोजाना 15-20 मिनट सिर्फ बच्चे के लिए निकालें। इस दौरान मोबाइल, टीवी या लैपटॉप से दूरी रखें। साथ में टहलें, खेलें, ड्रॉइंग करें या बस बातचीत करें। ऐसे शांत और सहज पल बच्चों को अपनी भावनाएं साझा करने का अवसर देते हैं।
मजबूत रिश्ता है जरूरी
बच्चे अपने मन की बात तभी साझा करते हैं, जब उन्हें लगता है कि सामने वाला उन्हें समझेगा, सुनेगा और स्वीकार करेगा। इसलिए माता-पिता का लक्ष्य सिर्फ सवाल पूछना नहीं, बल्कि ऐसा भरोसेमंद रिश्ता बनाना होना चाहिए, जहां 'ठीक हूं' के पीछे छिपी भावनाएं भी आसानी से बाहर आ सकें। याद रखें, बच्चों के साथ रोज होने वाली छोटी-छोटी बातचीत ही भविष्य में उनके आत्मविश्वास, मानसिक स्वास्थ्य और आपके रिश्ते की सबसे मजबूत नींव बनती है।
