3.5 साल की बेटी को स्पीच थेरेपिस्ट के पास ले गईं देबिना बनर्जी, जानिए बच्चे की आवाज कब बन जाती है चिंता की वजह

विशेषज्ञों के मुताबिक सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि बच्चा कितने शब्द बोल रहा है। यह देखना भी जरूरी है कि उसकी बात दूसरे लोग कितनी आसानी से समझ पाते हैं।

बच्चों का बोलना सीखना एक खूबसूरत लेकिन धीरे-धीरे आगे बढ़ने वाली प्रक्रिया है। इस दौरान वे कई शब्दों का गलत उच्चारण करते हैं, कुछ आवाजों को ठीक से नहीं बोल पाते या अपनी बात कहने में अटकते हैं। आमतौर पर माता-पिता इसे उम्र का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन सवाल यह है कि कब बच्चे की अस्पष्ट बोली या गलत उच्चारण पर विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए?

Speech Delay reasons and treatment

कुस उम्र तक बच्चों का ना बोलना सामान्य है? (Photo: iStock)

टीवी अभिनेत्री देबिना बनर्जी ने हाल ही में अपनी 3.5 साल की बेटी को स्पीच थेरेपिस्ट के पास ले जाकर इसी सवाल पर ध्यान खींचा है। उन्होंने अपने एक व्लॉग में स्पीच थेरेपिस्ट के साथ बेटी की मुलाकात की झलक साझा की। देबिना ने बताया कि उनकी बेटी भी दूसरे बच्चों की तरह कई बार शब्दों का गलत उच्चारण करती है या उन्हें ठीक तरह से नहीं बोल पाती। उनका मानना था कि बच्चे को बार-बार डांटकर सही बोलने के लिए कहना उसके आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकता है। इसलिए उन्होंने इसे किसी समस्या को ‘ठीक’ कराने के बजाय सही तरीके से मार्गदर्शन पाने का जरिया माना।

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