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क्या पर्दे लगाने से वायु प्रदूषण रोक सकते हैं, क्या पर्दे लगाकर एयर प्योरिफायर के बिना ही मिलेगी हवा साफ, जानें सच

can curtains hold air pollution (क्या मोटे पर्दे लगाने से घर में साफ हवा आती है): दिनोंदिन गंभीर होते वायु प्रदूषण के मामले में बाबा रामदेव ने कहा है कि पर्दे लगाकर भी घर में साफ हवा पाई जा सकती है। तो क्या सच में मोटा पर्दा लगाकर प्रदूषित हवा को घर से दूर रखा जा सकता है। जानते हैं इस बारे में एक्सपर्ट की राय।

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क्या पर्दों से वायु प्रदूषण रोका जा सकता है

can curtains hold air pollution: सर्दी के आने के साथ ही हर सांस दूभर होती जा रही है। AQI हर दिन के साथ खराब होता जा रहा है और वायु प्रदूषण हर साल अपना ग्राफ बढ़ा लेता है। ऐसे में साफ हवा के विकल्प के तौर पर एयर प्योरिफायर की डिमांड भी बढ़ रही है जो कम से कम आपको घर के एक कोने में साफ हवा में सांस लेने का मौका देता है। हालांकि बाबा रामदेव ने हाल ही में कहा है कि घर में पर्दे लगाकर भी घर में प्रदूषित हवा को आने से रोका जा सकता है। क्या वाकई में ऐसा है? जानते हैं कि पर्दे कैसे हवा को साफ कर सकते हैं और क्या ये प्रदूषित हवा को रोकने का सही विकल्प हैं?

क्या पर्दों से वायु प्रदूषण रोका जा सकता है

कुछ हद तक यह बात सच है लेकिन कारगर तभी है - जब पर्दे एक उचित मोटाई वाले हों। आगे बढ़ने से पहले एक बार ये जानना भी जरूरी है कि वायु प्रदूषण दो तरह का होता है। पहला बाहरी प्रदूषण, जो निर्माण कार्य, सड़कों से उड़ने वाली मिट्टी और वाहनों के धुएं से आता है। दूसरा इंडोर प्रदूषण जो घर के अंदर मौजूद धूल, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, फर्नीचर, पालतू जानवर, पौधे और रोजमर्रा की गतिविधियों से पैदा होता है।

इंदौर के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल के पल्मनरी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. रवि दोशी बताते हैं कि मोटे पर्दे खिड़कियों पर लगाने से वे एक फिजिकल बैरियर का काम करते हैं। खासतौर पर वे धूल के उन मोटे कणों को रोकने में सक्षम होते हैं जिनका आकार 5 माइक्रोन से अधिक (PM10) होता है। इससे सड़क या निर्माण स्थल से आने वाली मोटी धूल घर के अंदर कम प्रवेश करती है। हालांकि, यह तभी प्रभावी होता है जब घर में प्रॉपर वेंटिलेशन भी हो और खिड़कियों का इस्तेमाल पर्दों के साथ संतुलित रूप से किया जाए।

कहां काम करते हैं पर्दे

कहां काम करते हैं पर्दे (Pic: Canva)

यानी पर्दे से कुछ हद तक प्रदूषण को घर में आने से रोका जा सकता है। हालांकि तभी जब पर्दों की मोटाई अच्छी खासी हो। पतले और नेट वाले पर्दे इस मामले में आपकी मदद नहीं कर पाएंगे। हालांकि पर्दे वाला साफ हवा पाने का तरीका कहां फेल हो जाता है - इस बारे में वैशाली के मैक्स हॉस्टिपटल के पल्मनॉलजी विभाग के डायरेक्टर डॉक्टर शरद जोशी चेताते हैं।

उनका कहना है कि कुछ माइक्रोन जितने बड़े कणों को तो पर्दे रोक लेते हैं। लेकिन वायु प्रदूषण को पूरी तरह रोक नहीं पाते। पर्दे मुख्य रूप से धूल, परागकण और सड़क की मिट्टी जैसे बड़े कणों को ही पकड़ते हैं। सूक्ष्म कण (PM2.5), गैसें और धुएं के कण खिड़कियों के छोटे गैप से अंदर आ सकते हैं। इसलिए प्रदूषित हवा में कुछ साफ सांसें लेने में मोटे पर्दे एक सहायक उपाय हो सकते हैं, मगर ये पूर्ण समाधान नहीं हैं। अगर आपको प्रदूषित हवा से बचने का बेहतर उपाय चाहिए तो आपको अच्छी सीलिंग, खिड़कियों के टाइट बंद होने और वेंटिलेशन को मैनेज करने पर भी ध्यान देना होगा।

पर्दे कैसे रोकेंगे इतना प्रदूषण, प्यूरीफायर बने जरूरत

यानी ये साफ है कि मोटे पर्दे घर के अंदर वायु प्रदूषण को थोड़ा कम कर सकते हैं पर पूरी तरह रोक नहीं सकते। ये भले ही दिखाई देने वाली धूल को कुछ हद तक रोक लें और हवा के बहाव को कम कर दें, लेकिन PM2.5 जैसे सूक्ष्म कणों, जहरीली गैसों या एलर्जेन्स को फिल्टर नहीं कर पाते।

यही वजह है कि हैदराबाद के यशोदा हॉस्पिटल्स के कंसल्टेंट इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. प्रणय साईं चंद्रगिरी अब एयर प्यूरीफायर को लग्जरी नहीं स्वास्थ्य की जरूरत मानते हैं। उनका कहना है कि जहां इनडोर वायु प्रदूषण अधिक होता है, वहां बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा, एलर्जी, हृदय रोग या पुरानी फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों की स्वस्थ सांसों के लिए एयर प्यूरीफायर एक बड़ी जरूरत है। शोध बताते हैं कि HEPA फ़िल्टर वाले प्रमाणित एयर प्यूरीफायर घर के अंदर प्रदूषण को कम करते हैं और सांस लेने में आराम बढ़ाते हैं।

यानी डॉक्टर के इस तर्क से ये समझ में आता है कि पर्दे, पौधे या घरेलू उपाय सामान्य साफ-सफाई में सहायक हो सकते हैं, लेकिन वे प्रदूषित शहरों में एयर प्यूरीफायर का विकल्प नहीं बन सकते। केवल इन उपायों पर निर्भर रहना सुरक्षा का झूठा एहसास दे सकता है। इसलिए अच्छी सांसों के लिए जरूरी है कि हम सही ऑप्शंस को पहचानें।

वहीं डॉक्टर शरद जोशी का कहना है कि मोटे पर्दे और एयर प्योरिफायर से हवा साफ करना दो एकदम अलग तरीके हैं और एक साथ प्रयोग में लाने से ये ज्यादा प्रभावी भी बनाए जा सकते हैं। वह कहते हैं कि मोटे पर्दे लगाने से एयर प्योरिफायर की जरूरत पूरी तरह खत्म नहीं होती, लेकिन उसकी कार्यक्षमता पर दबाव थोड़ा कम हो सकता है। पर्दे बाहर से आने वाली मोटी धूल को कम करते हैं, जिससे एयर प्योरिफायर को कम गंदगी फिल्टर करनी पड़ती है। हालांकि, एयर प्योरिफायर सूक्ष्म कण (PM2.5), बैक्टीरिया, एलर्जन और कुछ गैसों को हटाने में ज्यादा प्रभावी होता है, जो पर्दे नहीं कर पाते। प्रदूषित शहरों में, खासकर बच्चों, बुजुर्गों या अस्थमा मरीजों के लिए, एयर प्योरिफायर अब भी जरूरी रहता है।

इसे इस तरह भी समझा जा सकता है कि फिल्टर किए गए पानी को उबालने के बाद जैसे उनकी स्वच्छता की गारंटी और बढ़ जाती है। वैसे ही अगर मोटे पर्दे और एयर प्योरिफायर को एक साथ यूज में लाया जाए तो घर की हवा को बाहर की तुलना में ज्यादा साफ और सांस लेने योग्य बनाया जा सकता है।

किस स्थिति में प्रदूषण में मदद करेंगे पर्दे

किस स्थिति में प्रदूषण में मदद करेंगे पर्दे

और सफाई भी जरूरी है

सिर्फ पर्दे या एयर प्योरिफायर लगा लेना ही साफ हवा की गारंटी नहीं है। दरअसल, इन चीजों को कायदे से मेंटेन भी करना पड़ता है। ऐसे न करने से इन पर जमे प्रदूषण के कण धीरे-धीरे आपकी सांसों के जरिए फेफड़ों में जमाकर आपको बीमार कर सकते हैं। तभी तो डॉ. रवि दोशी का कहना है कि मोटे पर्दों को समय-समय पर बदलना और गर्म पानी (50 डिग्री सेल्सियस से अधिक) में धोना चाहिए, ताकि उनमें जमा धूल और डस्ट माइट्स दोबारा घर की हवा में न फैलें। सफाई में ऐसी सावधानी बरतने से ही इनडोर पॉल्यूशन कम होगा और ऊर्जा बचत में भी मदद मिलेगी।

अंत में यह समझना जरूरी है कि शरीर की प्राकृतिक सफाई प्रणाली (जैसे फेफड़े और इम्यून सिस्टम) ही हवा के सूक्ष्म और गैसीय प्रदूषकों से वास्तविक सुरक्षा करती है। पर्दे या फिल्टर मददगार हैं, लेकिन वे पूरी तरह प्रदूषण को साफ नहीं कर सकते। स्वच्छ हवा को स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य समझा जाना चाहिए। जिस तरह पीने के पानी को सुरक्षित बनाने के लिए हम वॉटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करते हैं, उसी तरह प्रदूषित वातावरण में एयर प्यूरीफायर हमारे फेफड़ों की रक्षा करते हैं। स्वच्छ हवा में सांस लेना कोई विलासिता या अमीरी का एहसास नहीं, बल्कि एक बुनियादी आवश्यकता है। यह बीमारियों से बचाव और स्वास्थ्य संरक्षण से जुड़ा विषय है।

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