Basmati Rice Benefits For Metabolism: भारतीय खाने में चावल का खास स्थान है और बासमती चावल तो अपनी खुशबू, लंबे दानों और स्वाद के लिए दुनियाभर में मशहूर है। आमतौर पर लोग इसे सिर्फ स्वाद के लिए पसंद करते हैं, लेकिन अब एक नई रिसर्च ने इसके स्वास्थ्य लाभों पर भी रोशनी डाली है। हाल ही में किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि सही तरीके से प्रोसेस किया गया बासमती चावल मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। यह रिसर्च केरल यूनिवर्सिटी ऑफ फिशरीज एंड ओशन स्टडीज (KUFOS) के वैज्ञानिकों ने की है। अध्ययन के मुताबिक खास तकनीक से तैयार किया गया बासमती चावल ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में सहायक हो सकता है और स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर विकल्प बन सकता है।
बासमती चावल मेटाबॉलिज्म का साथी
नई रिसर्च में क्या सामने आया
इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने बासमती चावल पर खास प्रोसेसिंग तकनीक अपनाई, जिसमें जर्मिनेशन (अंकुरण) और पारबॉयलिंग को मिलाकर इस्तेमाल किया गया। शोध में पाया गया कि इस प्रक्रिया के बाद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स यानी GI कम हो जाता है। कम GI वाले खाद्य पदार्थ शरीर में धीरे-धीरे ग्लूकोज छोड़ते हैं, जिससे ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ता। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस वजह से बासमती चावल मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए उपयोगी हो सकता है।
स्वाद और क्वालिटी पर नहीं पड़ता असर
अक्सर यह चिंता होती है कि अगर किसी खाने की प्रोसेसिंग बदली जाए तो उसका स्वाद या टेक्सचर बदल सकता है। लेकिन इस रिसर्च में ऐसा नहीं पाया गया। वैज्ञानिकों ने हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग तकनीक से चावल की जांच की और पाया कि जर्मिनेशन और पारबॉयलिंग के बाद भी इसके स्वाद, खुशबू और टेक्सचर में खास बदलाव नहीं आता। यानी हेल्थ बेनिफिट्स बढ़ने के साथ-साथ इसका स्वाद भी लगभग वैसा ही बना रहता है।
PUSA 1121 बासमती की खासियत
अध्ययन में PUSA 1121 नाम की बासमती किस्म का भी जिक्र किया गया है। इसे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) ने विकसित किया है। यह किस्म अपने लंबे दानों, जल्दी पकने और पकने के बाद अच्छी गुणवत्ता के लिए जानी जाती है। रिसर्च के मुताबिक इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स मध्यम स्तर का होता है, जिससे यह हेल्थ-कॉन्शियस लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि चावल खाते समय मात्रा पर नियंत्रण रखना जरूरी है।
फूड टेस्टिंग में नई तकनीक का इस्तेमाल
इस स्टडी की एक खास बात यह भी है कि इसमें हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग तकनीक का उपयोग किया गया। आमतौर पर यह तकनीक मिट्टी या अन्य प्राकृतिक तत्वों की जांच में इस्तेमाल होती है, लेकिन अब इसका उपयोग खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने के लिए भी किया जा सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर इस तकनीक के जरिए एक डेटा बैंक तैयार किया जाए तो खाद्य पदार्थों में मिलावट या आणविक बदलाव को जल्दी पहचानना संभव हो सकेगा।
मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए अहम खोज
आजकल डायबिटीज, मोटापा और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में अगर रोजमर्रा के खाने में शामिल चीजें ही थोड़ी ज्यादा हेल्दी बन जाएं तो यह बड़ी राहत हो सकती है। इस स्टडी के नतीजे बताते हैं कि सही प्रोसेसिंग के बाद बासमती चावल सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि हेल्थ के लिहाज से भी बेहतर विकल्प बन सकता है। हालांकि विशेषज्ञ संतुलित आहार और सही मात्रा में सेवन की सलाह देते हैं ताकि इसका अधिकतम फायदा मिल सके।
