Gold Oxidation Science: हजारों साल पुराने मिस्र के पिरामिडों से निकले सोने के तारों से कढ़े कपड़े हों या हमारी दादियों-नानियों के जमाने के गहने, एक चीज जो सबको हैरान करती है, वह है सोने की कभी ना धूमिल पड़ने वाली चमक। लोहा, हवा और नमी के संपर्क में आते ही कुछ दिनों में जंग लगकर भूरा हो जाता है, तांबा हरा पड़ने लगता है और चांदी भी काली हो जाती है। लेकिन सोना हमेशा वैसा ही चमकदार बना रहता है। सोने का यही गुण और साथ में उपलब्धता की कमी इसके महंगे होने का भी कारण है।
सोने की चमक का राज वैज्ञानिकों ने खोजा
रही बात इसके ऑक्सीडेशन की, तो अब तक दुनिया यही मानती थी कि सोने की केमिस्ट्री यानी उसका रासायनिक स्वभाव ही ऐसा है कि वह किसी से क्रिया नहीं करता। लेकिन टूलेन यूनिवर्सिटी (Tulane University) के शोधकर्ताओं ने एक बिल्कुल नया और चौंकाने वाला खुलासा किया है। प्रतिष्ठित साइंस जर्नल 'फिजिकल रिव्यू लेटर्स' (Physical Review Letters) में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, सोने के पास एक सीक्रेट 'सेल्फ डिफेंस सिस्टम' होता है, जिसके कारण इसमें कभी जंग और इसकी चमक धुंधली नहीं होती।
क्या है सोने का सेल्फ डिफेंस
इस थ्योरी को समझने के लिए एक उदाहरण लेते हैं। जंग का लगना यानी धातु के अणुओं का ऑक्सीजन के साथ क्रिया करना। अब मान लीजिए कि आपके घर के बाहर कुछ उपद्रवी तत्व (ऑक्सीजन के अणु) खड़े हैं जो अंदर घुसकर तोड़-फोड़ (ऑक्सीडेशन या जंग लगाना) करना चाहते हैं। सामान्य तौर पर अगर घर के सुरक्षाकर्मी (परमाणु या एटम्स) ढीले ढाले खड़े रहें, तो उपद्रवी आसानी से अंदर घुस जाएंगे लेकिन सोने के मामले में ऐसा नहीं होता। टूलेन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग में केमिकल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर मैथ्यू मोंटेमोर और पोस्टडॉक्टरल फेलो संतु बिस्वास ने कंप्यूटर सिमुलेशन (एडवांस डिजिटल मैपिंग) के जरिए जब सोने की सतह का अध्ययन किया, तो उन्हें एक अद्भुत नजारा दिखा।
जैसे ही ऑक्सीजन के अणु सोने की सतह पर हमला करते हैं, सोने की सतह पर मौजूद परमाणु तुरंत हरकत में आ जाते हैं। वे खुद को एक ऐसे बेहद मजबूत और खास ज्यामितीय पैटर्न में री-अरेंज कर लेते हैं, जो ऑक्सीजन के लिए एक अभेद्य दीवार बन जाता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि यह एटॉमिक री-अरेंजमेंट ऑक्सीजन की रिएक्शन करने की क्षमता को 10 खरब (1 Trillion) गुना तक कम कर देता है। यही कारण है कि सोना लंबे काल तक बिना पॉलिश के भी चमकता रहता है।
सिर्फ ज्वेलरी नहीं, क्लीन एनर्जी की दुनिया भी बदलेगी
यह खोज सिर्फ गहनों की चमक बरकरार रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सबसे बड़ा फायदा इंडस्ट्रियल मैन्यूफैक्चरिंग और क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में होने जा रहा है क्योंकि सोना एक बेहतरीन 'कैटलिस्ट' है। अब रहा सवाल कि कैटलिस्ट क्या होता है, आइए समझते हैं। जैसे किसी शादी में एक 'मैचमेकर' या अगुआ होता है, जो खुद तो शादी नहीं करता लेकिन दो परिवारों को तेजी से करीब ला देता है। ठीक वैसे ही, केमिस्ट्री में कैटलिस्ट वह पदार्थ होता है जो खुद किसी रासायनिक प्रक्रिया में खर्च नहीं होता, लेकिन दो रसायनों के बीच की प्रक्रिया को कई गुना तेज या धीमे कर देता है। जो प्रक्रिया को तेज करता है वो कहलाता है पॉजिटिव कैटलिस्ट और सोना भी कुछ ऐसा ही है।
आज की तारीख में प्लास्टिक बनाने के लिए जरूरी रसायन 'विनाइल एसीटेट' के उत्पादन में गोल्ड-पैलेडियम कैटलिस्ट का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा, गाड़ियों के साइलेंसर से निकलने वाली जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस को बाहर निकलने से पहले खत्म करने के लिए भी वैज्ञानिक गोल्ड कैटलिस्ट पर रिसर्च कर रहे हैं।
विज्ञान के सामने नई चुनौती और समाधान
परेशानी यह है कि ऑक्सीजन के साथ रिएक्ट ना करना, सोने को गहनों के लिए खूबी है, वही खूबी इसे फैक्ट्रियों में एक कमजोर कैटलिस्ट बना देती है। क्योंकि कई औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए यह जरूरी होता है कि सोना ऑक्सीजन के अणुओं को अपने ऊपर सोखे और उन्हें आपस में तोड़े। प्रोफेसर मैथ्यू मोंटेमोर के मुताबिक, इस नई खोज से वैज्ञानिकों को एक नया रास्ता मिल गया है। उन्होंने कहा कि अगर किसी तरह सोने की सतह के परमाणुओं को खुद को री-अरेंज करने से रोक दें, तो सोना ऑक्सीजन को आसानी से तोड़ पाएगा। इससे भविष्य में बेहद शक्तिशाली और कुशल गोल्ड-बेस्ड कैटलिस्ट बनाया जा सकेगा।
अब तक वैज्ञानिक सोने की क्षमता बढ़ाने के लिए उसमें दूसरी महंगी धातुएं मिलाते थे या उसके बेहद बारीक नैनोपार्टिकल्स का उपयोग करते थे। लेकिन टूलेन यूनिवर्सिटी के इस ऐतिहासिक शोध से एक नया रास्ता दिखा है। उम्मीद है कि भविष्य में सोने की सतह के 'भूगोल' को समझकर और उसके परमाणुओं के पैटर्न को कंट्रोल करके भी इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर यह खोज सफल रही, तो निश्चित ही यह आने वाले समय में प्रदूषण नियंत्रण और ग्रीन टेक्नोलॉजी में मील का पत्थर साबित होगी।
