Explained: क्यों खत्म होने जा रहा है 'लीप सेकंड'? जानिए 86,400 सेकंड के दिन से लेकर परमाणु घड़ी और पृथ्वी की बदलती चाल की पूरी कहानी

क्या आपको पता है कि पृथ्वी की घूमने की चाल बदलने और परमाणु घड़ियों की सटीकता के कारण 'लीप सेकंड' की व्यवस्था खत्म हो सकती है। आइए जानते हैं प्राचीन मिस्र से लेकर आज तक समय मापने का सफर।

Science News: क्या आपने कभी सोचा है कि अगर अचानक आपकी घड़ी 11:59:59 के बाद 12:00:00 बजाने के बजाय 11:59:60 दिखाए, तो क्या होगा? लेकिन ये कोई साइंस-फिक्शन नहीं है। भौतिक विज्ञान दुनिया में इसे 'लीप सेकंड' (Leap Second) कहा जाता है। जिस तरह हर चार साल में हमारे कैलेंडर और सूर्य के चक्कर के तालमेल को बनाए रखने के लिए फरवरी में 29वां दिन (लीप ईयर) जोड़ा जाता है, ठीक उसी तरह हमारी डिजिटल घड़ियों और पृथ्वी के घूमने की प्राकृतिक चाल को एक सीध में रखने के लिए वैज्ञानिक समय-समय पर एक सेकंड का तालमेल बिठाते रहे हैं।

Leap Second Explanation

बंद हो सकती है 'लीप सेकंड' जोड़ने की परंपरा

लेकिन अब, 13 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच भार और माप पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (General Conference on Weights and Measures) में इस व्यवस्था को हमेशा के लिए खत्म करने पर अंतिम मुहर लग सकती है। यदि मसौदा प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो 20 मई 2027 से हमारी समय प्रणाली से अचानक लीप सेकंड जोड़ने की यह परंपरा इतिहास बन जाएगी। आखिर समय मापने के हमारे तौर-तरीके कैसे बदले? 60 मिनट और 60 सेकंड की व्यवस्था कहां से आई? और आज पृथ्वी की तेज रफ्तार कंप्यूटर और घड़ियों के लिए क्यों सिरदर्द बन गई है? आइए इस पूरे विज्ञान और इतिहास को समझते हैं।

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