Pencil Nebula: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) लगातार अपने सोशल मीडिया हैंडल पर ब्रह्मांड की दिलचस्प तस्वीरें साझा करता है। इन तस्वीरों को देखकर कई बार तो लोग विस्मय से भर जाते हैं, जबकि कई बार ब्रह्मांड की खूबसूरती को देख मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। हालही में नासा ने पेंसिल नेबुला की एक अद्भुत तस्वीर शेयर की है, जिसकी रोशनी की काला घना अंतरिक्ष भी रोशन दिखाई दे रहा है।
पेंसिल नेबुला (फोटो साभार: NASAHubble)
NASAHubble ने साझा की तस्वीर
नासा ने हबल स्पेस टेलीस्कोप की मदद से कैप्चर किए गए पेंसिल नेबुला, जिसे NGC 2736 के नाम से भी जाना जाता है, की अद्भुत तस्वीर को साझा किया। नासा ने इंस्टाग्राम पर फोटो साझा करते हुए अंतरिक्षप्रेमियों के मजे लेने की कोशिश की। तभी तो नासा ने कैप्शन में लिखा- अपनी पेंसिल भूल गए? आप हमारी पेंसिल उधार ले सकते हैं।
पेंसिल नेबुला कहां हैं?
NGC 2736 पृथ्वी से लगभग 800 प्रकाश वर्ष दूर है और लगभग 4 लाख मील प्रति घंटे की रफ्तार से घूम रहा है। अगर आप लोग सोच रहे हैं कि ये नेबुला क्या है? तो हम आपको बता दें कि धूल और गैस से बने बादल, जो तारों के बीच घूमते हैं, उन्हें नेबुला कहा जाता है।
पेंसिल नेबुला (इंस्टाग्राम फोटो साभार: NASAHubble)
कैसे बना पेंसिल नेबुला?
पेंसिल नेबुला ब्रह्मांड की अद्भुत वस्तुओं में से एक है। साथ ही यह वेला सुपरनोवा अवशेष का एक हिस्सा है। 1840 के दशक में सर जॉन हर्शेल ने पेंसिल नेबुला की खोज की थी। बकौल नासा, तस्वीर में दिखाई देने वाला पेंसिल नेबुला तब बना जब हजारों साल पहले एक तारे में विस्फोट हुआ था।
आसान शब्दों में कहें तो यह नेबुला एक विस्फोटित तारे का अवशेष है। हालांकि, इस सुपरनोवा का खगोलविदों के पास रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। इसके बावजूद अनुमान लगाया कि यह विस्फोट लगभग 11,000 वर्ष पहले हुआ होगा।
पेंसिल नेबुला की क्या है कहानी?
हबल स्पेस टेलीस्कोप की छवि में गैस और धूल का एक क्रीम और भूरे रंग का स्तंभ दिखाई दे रहा है, जो देखने में एक पेंसिल जैसा प्रतीत होता है। इसलिए इसका सामान्य नाम पेंसिल नेबुला पड़ा। बकौल नासा, पेंसिल नेबुला का क्षेत्र लगभग तीन चौथाई प्रकाश वर्ष चौड़ा है।
कैसे चमकते हैं नेबुला?
नेबुला घने गैस क्षेत्रों की वजह से चमकदार दिखाई देता है। दरअसल, यह गैस क्षेत्र सुपरनोवा शॉक वेव से प्रभावित होते हैं। जैसे ही शॉक वेव स्पेस में चहलकदमी करती है तो अंतरतारकीय पदार्थ से इसका टकराव होता है। शुरू में गैस लाखों डिग्री तक गर्म होती है, लेकिन फिर यह ठंडी हो जाती है। जिसकी वजह से ऑप्टिकल लाइट निकलती है और पेंसिल नेबुला चमकदार दिखाई देता है।
