17 साल तक मना 26 जनवरी पर स्वतंत्रता दिवस, तो कैसे बनी ये तारीख Republic Day?

26 जनवरी वह तारीख है, जिसे आज हम गणतंत्र दिवस के रूप में जानते हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब यही दिन भारत का स्वतंत्रता दिवस हुआ करता था। लगातार 17 सालों तक इस तारीख ने देशवासियों में आजादी का जोश और संकल्प जगाए रखा। तो आखिर कैसे स्वतंत्रता की प्रतीक बनी 26 जनवरी ने भारत के गणतंत्र दिवस का रूप लिया, आज हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं।

Republic Day History: भारत सिर्फ एक भू-भाग नहीं बल्कि एक अखंड भावना है, जहां करोड़ों लोग विविधता में एकता का शानदार उदाहरण पेश करते हैं। जिस आजादी को हम जीते हैं वह कई बलिदानों के बाद हमें मिली है। जल्द ही हम 77वां गणतंत्र दिवस मनाएंगे और इसके लिए देश के हर कोने में तैयारियां जोरों पर है। दिल्ली के कर्तव्य पथ की परेड हो, या स्कूलों में देशभक्ति गानों पर बच्चों की प्रस्तुति, हम हर तरीके से अपने वतन के लिए अपनी भावना व्यक्त करना जानते हैं। आजादी मिलने का इतिहास भी रोचक है, इसी कड़ी में तारीखों का महत्व भी बदला। और शायद एक ऐसा भी है सच है जिससे आप अंजान हो.......

Republic Day History

क्या है 26 जनवरी का सच?

लाहौर अधिवेशन (फोटो: Wikimedia Commons)

‘पूर्ण स्वराज’ का संकल्प

बता दें कि यह बात 1929 की है, जब भारत और पाकिस्तान का विभाजन नहीं हुआ था और रावी नदी के तट पर स्थित लाहौर भारत का एक प्रमुख शहर माना जाता था। उसी समय लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का ऐतिहासिक अधिवेशन आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की। इस अधिवेशन में कांग्रेस ने ब्रिटिश सरकार से डोमिनियन स्टेटस यानी सीमित स्वशासन की मांग को त्यागते हुए पहली बार ‘पूर्ण स्वराज’ का संकल्प अपनाया। लाहौर अधिवेशन (Lahore Session) में यह भी तय किया गया कि 26 जनवरी 1930 को पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाएगा। उस दिन देशवासियों ने पहली बार तिरंगा फहराया और अंग्रेजी शासन से मुक्ति की शपथ ली। इसके बाद 1930 से 1947 यानी 17 सालों तक हर साल 26 जनवरी को भारत में प्रतीकात्मक स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा।

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