Zubeen Garg Death Case Supreme Court: असम के गायक जुबिन गर्ग की मौत से जुड़े मामले में नॉर्थईस्ट फेस्टिवल के आयोजक श्यामकानु महंत की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने अब मामले को 5 अक्टूबर को सुनवाई के लिए लिस्ट करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साथ ही असम सरकार से मुकदमे की सुनवाई में तेजी और पूरी तत्परता बरतने को कहा है।
गायक जुबिन गर्ग की मौत का मामला, नॉर्थईस्ट फेस्टिवल के आयोजक की जमानत पर हुई सुनवाई, क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?
महंत के वकील ने क्या दलील दी?
महंत की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि असम पुलिस का मामला मूल रूप से यह है कि जुबिन गर्ग एक वयस्क व्यक्ति थे, नाव पर गए, लाइफ जैकेट पहनकर समुद्र में उतरे और कुछ देर बाद समुद्र से बाहर भी आए। उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्होंने किसी परेशानी की बात कही और फिर तैरते समय उनके साथ कुछ हुआ और वह डूब गए।
दवे ने कहा कि घटना सिंगापुर में हुई थी और वहां के अधिकारियों ने पोस्टमार्टम किया था। उनके मुताबिक पोस्टमार्टम में मौत का कारण डूबना बताया गया और हत्या की बात सामने नहीं आई।
उन्होंने कहा कि मामले में कुल 394 गवाह हैं, जिनमें से अभी तक केवल 94 गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं। ट्रायल शुरू हो चुका है और कई एफआईआर को एक साथ जोड़ा गया है।
'वयस्क व्यक्ति को शराब पीने से कैसे रोक सकता था?'
दवे ने आपराधिक साजिश के आरोप पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अभियोजन का आरोप है कि महंत ने गर्ग की उचित देखभाल नहीं की, उन्हें शराब उपलब्ध कराई और इसी आधार पर साजिश का आरोप लगाया गया है।उन्होंने कहा कि गर्ग वयस्क थे और यदि वह शराब पीना चाहते थे तो महंत उन्हें ऐसा करने से कैसे रोक सकते थे।
असम सरकार ने जमानत के विरोध में क्या कहा?
असम सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल देवजीत सैकिया ने दलील दी कि यह महज दुर्घटना का मामला नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना से पहले की दो रातों में याचिकाकर्ता ने लगातार एक लड़की और शराब की बोतल उपलब्ध कराई, ताकि गर्ग पूरी तरह नशे में रहें। उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को गर्ग को सिंगापुर जाने पर हामी नहीं भरनी चाहिए थी।
सरकार की ओर से यह भी दावा किया गया कि याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर ऐसा बयान दिया था कि अगर गर्ग सिंगापुर नहीं गए तो वह आत्महत्या कर लेगा। सरकार ने इसी आधार पर मामले में आपराधिक साजिश होने का तर्क दिया।
जस्टिस नागरत्ना ने पूछा- हत्या के पीछे वजह क्या थी?
सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने पूछा कि महंत इस आयोजन के मैनेजर थे तो गर्ग को खत्म करने की उनकी कथित मंशा यानी मोटिव क्या था? असम के एडवोकेट जनरल ने जवाब दिया कि महंत नॉर्थईस्ट में नियमित रूप से कार्यक्रम आयोजित करते हैं और इसी भूमिका के संदर्भ में अभियोजन ने उनके खिलाफ साजिश का आरोप लगाया है।
94 गवाहों की गवाही पूरी, अहम गवाहों के बयान जल्द
असम सरकार ने कोर्ट को बताया कि ट्रायल रोजाना आधार पर चल रहा है और अब तक 94 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। सरकार के मुताबिक मामले के कुछ सबसे महत्वपूर्ण प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान अगले 15 दिनों में दर्ज किए जाने की संभावना है।
इस पर महंत की ओर से दवे ने कहा कि जिन 94 गवाहों की गवाही हो चुकी है, उनमें से एक भी महत्वपूर्ण गवाह नहीं है।
