Uttarkashi Tunnel rescue : उत्तरकाशी के सिलक्यारा सुरंग में फंसे सभी 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। केंद्र एवं राज्य की एजेंसियों की कड़ी मेहनत एवं जज्बे की बदौलत राहत एवं बचाव अभियान का कार्य 17वें दिन पूरा हो गया। सुरंग से बाहर सभी श्रमिकों का स्वास्थ्य जांच हुआ है और वे फिट हैं। सरकार ने उन्हें एक लाख रुपए की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रमिकों से बात की और उन्हें मदद का भरोसा दिया। श्रमिकों ने अपने परिजनों से बात की है। सुरंग में 16 रात आसान नहीं था, लेकिन इन्होंने हिम्मत नहीं हारी, अपना हौसला बनाए रखा। मुश्किल घड़ी में खुद को सुरक्षित रखने वाले ये 41 श्रमिक आखिर किस राज्य के हैं, यहां हम इसकी लिस्ट दे रहे हैं-
सुरंग से निकलने के बाद प्रधानमंत्री मोदी से बात करते श्रमिक।
41 श्रमिकों के नाम और उनके राज्य
| क्रम संख्या | नाम | राज्य |
| 1 | गब्बर सिह नेगी | उत्तराखंड |
| 2 | सबाह अहमद | बिहार |
| 3 | सोनू शाह | बिहार |
| 4 | मनिर तालुकदार | पश्चिम बंगाल |
| 5 | सेविक पखेरा | पश्चिम बंगाल |
| 6 | अखिलेश कुमार | यूपी |
| 7 | जयदेव परमानिक | पश्चिम बंगाल |
| 8 | वीरेन्द्र किसकू | बिहार |
| 9 | सपन मंडल | ओडिशा |
| 10 | सुशील कुमार | बिहार |
| 11 | विश्वजीत कुमार | झारखंड |
| 12 | सुबोध कुमार | झारखंड |
| 13 | भगवान बत्रा | ओडिशा |
| 14 | अंकित | यूपी |
| 15 | राम मिलन | यूपी |
| 16 | सत्यदेव | यूपी |
| 17 | सन्तोष | यूपी |
| 18 | जय प्रकाश | यूपी |
| 19 | राम सुन्दर | उत्तराखंड |
| 20 | मंजीत | यूपी |
| 21 | अनिल बेदिया | झारखंड |
| 22 | श्राजेद्र बेदिया | झारखंड |
| 23 | सुकराम | झारखंड |
| 24 | टिकू सरदार | झारखंड |
| 25 | गुनोधर | झारखंड |
| 26 | रनजीत | झारखंड |
| 27 | रविन्द्र | झारखंड |
| 28 | समीर | झारखंड |
| 29 | विशेषर नायक | ओडिशा |
| 30 | राजू नायक | ओडिशा |
| 31 | महादेव | झारखंड |
| 32 | मुदतू मुर्म | झारखडं |
| 33 | धीरेन | ओडिशा |
| 34 | चमरा उरॉव | झारखंड |
| 35 | विजय होरो | झारखंड |
| 36 | गणपति | झारखंड |
| 37 | संजय | असम |
| 38 | राम प्रसाद | असम |
| 39 | विशाल | हिमाचल प्रदेश |
| 40 | पु्ष्कर | उत्तराखंड |
| 41 | दीपक कुमार | बिहार |
NDRF के टीम कमांडर ने क्या कहा
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बचाने के लिए जैसे ही राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के चार जवान मलबे के दूसरे छोर तक पहुंचे श्रमिकों की सुरक्षित निकासी की उम्मीदें बढ़ गयी। एनडीआरएफ के टीम कमांडर मनमोहन ने बताया, ‘जैसे ही हमने उनकी ओर हाथ हिलाया और घोषणा की कि एनडीआरएफ की एक टीम उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए यहां है और उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, श्रमिकों के समूह के बीच जबरदस्त उत्साह पैदा हो गया।’ उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ की टीम करीब दो घंटे तक वहां मौजूद रही।
