'होममेकर ही असली नेशन बिल्डर', सुप्रीम कोर्ट ने 25 साल पुराने मामले में सुनाया ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि घर संभालने वाली महिला यानी 'होममेकर' की भूमिका को केवल घरेलू कामकाज तक सीमित नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि घर संभालने वाली महिला यानी 'होममेकर' की भूमिका को केवल घरेलू कामकाज तक सीमित नहीं माना जा सकता। वह परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं। इसलिए सड़क दुर्घटना में किसी होममेकर की मृत्यु होने पर उसके परिवार को मिलने वाले मुआवजे की गणना करते समय उसकी घरेलू सेवाओं और देखभाल के नुकसान को एक स्वतंत्र और अलग क्षतिपूर्ति मद (Head of Compensation) के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।

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'होममेकर ही हैं असली नेशन बिल्डर': सुप्रीम कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर)

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि होममेकर की घरेलू सेवाओं का न्यूनतम आर्थिक मूल्य 30,000 रुपये प्रति माह माना जाएगा। अदालत ने इस अवधारणा को 'Loss of Domestic Care' नाम दिया है। यह फैसला 25 साल पुराने एक मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले में सुनाया गया है। ये फैसला न्यायमूर्ति संजय करोल ने लिखा है।

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