भावनाएं आहत होती हैं तो शाकाहारी व्यक्ति मांसाहारी होटल से खाना खरीदता क्यों है, उपभोक्ता आयोग का तर्क

आयोग ने एक भोजनालय के खिलाफ दो व्यक्तियों द्वारा की गई उस शिकायत को खारिज कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्हें शाकाहारी भोजन मंगाने बावजूद मांसाहारी भोजन परोसा गया।

Consumer Panel on Non-Veg Good: मुंबई में एक उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक शख्स को मांसाहारी खाना परोसने के आरोप में अजब तर्क दिया है। आयोग ने कहा कि मांसाहारी भोजन से किसी शाकाहारी व्यक्ति की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं तो वह ऐसी जगह से भोजन खरीदता ही क्यों है जहां शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार का भोजन उपलब्ध होता है। मुंबई उपनगरीय (अतिरिक्त) जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने पिछले महीने जारी आदेश में कहा कि यह तर्कसंगत लगता है कि कोई समझदार व्यक्ति भोजन ग्रहण करने से पहले शाकाहारी और मांसाहारी भोजन के बीच फर्क पहचान सकता है।

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नॉन-वेज खाने पर विवाद

आयोग ने शिकायत को किया खारिज

आयोग ने एक भोजनालय के खिलाफ दो व्यक्तियों द्वारा की गई उस शिकायत को खारिज कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्हें शाकाहारी भोजन मंगाने बावजूद मांसाहारी भोजन परोसा गया। आयोग ने इस मामले में कहा, अगर शिकायतकर्ता शाकाहारी हैं और मांसाहारी भोजन से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, तो उन्होंने ऐसा रेस्तरां क्यों चुना जहां शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह का भोजन उपलब्ध था, बजाय इसके कि वे केवल शाकाहारी भोजन परोसने वाले रेस्तरां से ऑर्डर करते।

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