Electoral Bonds News: चुनावी बॉन्ड पर क्यों चला SC का डंडा? लौटाना होगा इनकैश नहीं हुए इलेक्टोरल बॉन्ड

  • Written by: आलोक कुमार राव
  • Updated Feb 15, 2024, 03:54 PM IST

Electoral Bonds : शीर्ष अदालत ने भारतीय स्टेट बैंक को इलेक्टोरल बॉन्ड आगे जारी करने से रोक दिया है। बैंक को चुनावी बॉन्ड के जरिए मिले अनुदान के ब्योरे पेश करने और ऐसे राजनीतिक दलों जिन्हें अनुदान मिला है, उनके विवरण चुनाव आयोग के पास छह मार्च तक जमा कराने के लिए कहा है।

Electoral Bonds : सरकार की चुनावी बॉन्ड योजना पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) इसे न तो बेच पाएगा और न ही राजनीतिक दल इसे भुना पाएंगे। लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव एवं राजनीति में पारदर्शिता लाने के लिए शीर्ष अदालत का यह फैसला अहम है। इलेक्टोरल बॉन्ड के समर्थन में सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि इससे चुनावी खर्चे में पारदर्शिता और काले धन के प्रवाह पर रोक लगेगी लेकिन प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच जजों की संवैधानिक पीठ को उसकी दलील में दम नहीं लगा और उसने याचिकाकर्ताओं के तर्कों को स्वीकार करते हुए इलेक्टोरल बॉन्ड को 'असंवैधानिक' करार दे दिया।

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चुनावी बॉन्ड पर रोक से राजनीतिक दलों को लगा झटका।

'सबसे ज्यादा चंदा सत्तासीन दल को'

साथ ही उसने एसबीआई को आदेश दिया कि उसने अब तक जो भी बॉन्ड बेचे हैं उसका सारा विवरण वह चुनाव आयोग के पास भेजे। कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग को भी चुनावी बॉन्ड से जुड़ी सभी जानकारियों को अपनी वेबसाइट पर डालना होगा। याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि चंदा सत्ता में रहने वाली पार्टी को सबसे ज्यादा मिलता है। व्यक्ति या कंपनियां बॉन्ड के जरिए उस दल को सबसे ज्यादा अनुदान देती हैं जो या तो सत्ता में होती है या जिनके सत्ता में आने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। विरोधी एवं छोटे दलों को ज्यादा अनुदान नहीं मिल पाता। इसलिए इसमें समान अवसर मिलना चाहिए।

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