Monsoon Session: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने टाइम्स नाउ नवभारत के पॉडकास्ट में आगामी मानसून सत्र से लेकर विधानसभा चुनावों तक खुलकर बात की। इस दौरान, जयराम रमेश ने कांग्रेस पार्टी द्वारा चलाए जा रहे संगठनात्मक कार्यक्रमों के बारे में भी जानकारी दी। साथ ही, सरकार की नीयत पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि राजनीति में कभी भी आराम करने का समय नहीं है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश
राहुल की छुट्टी को लेकर क्या बोले जयराम रमेश?
राहुल गांधी 20 दिनों की छुट्टियों के बाद वापस लौटे? इस सवाल पर जयराम रमेश ने कहा, ''प्रधानमंत्री कितने बार बाहर जाते हैं? आप प्रधानमंत्री से जवाब क्यों नहीं पूछते हैं?'' उन्होंने कहा कि 10 दिन की छुट्टी लेना स्वाभाविक है और वह इस दौरान भी मल्लिकार्जुन खरगे, पार्टी नेताओं और पीसीसी अध्यक्षों के निरंतर संपर्क में रहते हैं। जयराम रमेश के मुताबिक, पार्टी को महज एक व्यक्ति के नज़रिए से देखना गलत है।
'17 अप्रैल को बहुत बड़ी बेइज्जती हुई'
जयराम रमेश ने आगे विशेष सत्र का जिक्र करते हुए गृह मंत्री पर निशाना साधा। बकौल जयराम रमेश, गृह मंत्री ने बहुत 'चालाकी' के साथ एक विशेष सत्र बुलाया था, ताकि परिसीमन विधेयक पास कराकर बड़ी हेडलाइन बनाई जा सके। हालांकि, 17 अप्रैल को सरकार को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला, जिससे सरकार की "बहुत बड़ी बेइज्जती" हुई। उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्होंने टीएमसी और शिवसेना को तोड़ा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि 17 अप्रैल को दो-तिहाई बहुमत के लिए सरकार को 352 मतों की आवश्यकता थी, लेकिन उन्हें केवल 298 मत ही मिले। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सरकार राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत की ओर जा रही है। उनको 7-8 की जरूरत है, लेकिन लोकसभा में उन्हें बहुमत नहीं मिलेगा।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संविधान संशोधन विधेयक के लिए दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में अलग-अलग दो-तिहाई बहुमत मिलना अनिवार्य है। उन्होंने मीडिया में चल रही संयुक्त बैठक की खबरों को एक "मनोवैज्ञानिक खेल" करार दिया और कहा कि संविधान के अनुसार इस मामले में संयुक्त बैठक नहीं हो सकती है।
'हम चुपचाप करते हैं तैयारी'
जयराम रमेश ने भाजपा की मौजूदा तैयारियों से जुड़े सवाल पर कहा, ''वो भी तैयारी कर रहे हैं और हम भी, लेकिन फर्क यह है कि हम चुपचाप तैयारी करते हैं... तीन साल पहले बनाई गई एक पार्टी जिसका नाम किसी को पता नहीं था वह राजग का दूसरा सबसे बड़ा घटक दल बन गया है। एनसीपीआई में टीएमसी के 20 सांसदों का विलय कराया गया।'' हालांकि, उन्होंने एक बात स्पष्ट की कि राजग को लोकसभा में बहुमत नहीं मिलेगा।
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क्या सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी?
जब जयराम रमेश से पूछा गया कि राहुल गांधी कांग्रेस की आंतरिक बैठकों में कई बार कह चुके हैं कि यह सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी? तो इस पर उन्होंने दो टूक जवाब देते हुए कहा, ''संकट का समय आ गया है।'' उन्होंने देश की वर्तमान स्थिति को 'अमृत काल' के बजाय 'संकट काल' करार दिया। उन्होंने कहा, ''यह संकट इसलिए भी आ रहा है, क्योंकि भाजपा और चुनाव आयोग का एक तालमेल है और वह भाजपा का पूरा साथ दे रही है।''
उन्होंने कहा कि एसआईआर के माध्यम से लाखों मतदाताओं को मतदाता सूची से हटाया जा रहा है, जो देश के नागरिक, रिटायर अधिकारी, शिक्षक इत्यादि हैं। अगर चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराया जाए तो भाजपा को बहुमत मिलने की गुंजाइश ही नहीं है। उन्होंने कहा कि एसआईआर के मुद्दे को लेकर 24 विपक्षी पार्टियों ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है, जिसमें डीएमके और आम आदमी पार्टी भी शामिल हैं।
'संगठन सृजन अभियान अध्यक्षों का बना रहा सशक्त'
जयराम रमेश ने बताया कि कांग्रेस पिछले डेढ़ साल से 'संगठन सृजन' अभियान चला रही है। इस अभियान ने अध्यक्षों को और सशक्त बना रहा है। इसके जरिए करीब 700-800 जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। ये नियुक्तियां आपसी मशवरे और आम सहमति से की जा रही हैं। अभी लगभग 600 जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है और अभी 200 बाकी हैं।
